Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कर्मचारियों पर की जाने वाली अनुशासनिक कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने जल संसाधन विभाग के पूर्व सहायक अभियंता श्याम नाथ दूबे की याचिका स्वीकार करते हुए उनकी पेंशन से आजीवन 10 प्रतिशत कटौती के आदेश को रद्द कर दिया। श्याम नाथ दूबे 30 जून 2013 को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उनके खिलाफ पांच आरोपों को लेकर विभागीय जांच हुई और 21 जुलाई 2015 को पेंशन में कटौती का आदेश पारित किया गया। इस आदेश के खिलाफ की गई अपील को 18 फरवरी 2021 को खारिज कर दिया गया था।
दस्तावेज खुद सबूत नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि केवल दस्तावेज संलग्न कर देने से आरोप सिद्ध नहीं होते। जांच अधिकारी के समक्ष दस्तावेजों को कानूनी तरीके से साबित करना जरूरी है। राज्य सरकार ने भी स्वीकार किया कि जांच के दौरान कोई गवाह पेश नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना विधि सम्मत साक्ष्य के आरोप सिद्ध नहीं माने जा सकते। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया गया।
राज्य को सभी लाभ देने का निर्देश
हाई कोर्ट ने दंडात्मक आदेश और अपील खारिज करने के फैसले को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश लाभ सहित सभी देय लाभ शीघ्र भुगतान करे।

