Ranchi: चतरा शहर को जोड़ने वाली प्रस्तावित बाईपास सड़क के निर्माण के लिए 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई पर झारखंड हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान होगा।
अदालत ने सड़क निर्माण के उस हिस्से पर भी रोक लगा दी है, जहां पेड़ों की कटाई जरूरी है। साथ ही संबंधित एजेंसियों को सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है, ताकि अधिक से अधिक पेड़ों को बचाया जा सके। कोर्ट ने मामले में अब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है। दोनों मंत्रालयों को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा।
अदालत ने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि इसमें पशु-पक्षी, कीट और दूसरे जीव-जंतु भी शामिल हैं। यह एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में पूर्ण विकसित पेड़ों को काटकर बाद में पौधे लगाना मौजूदा पर्यावरण की भरपाई नहीं कर सकता। नए पौधों को पूर्ण विकसित पेड़ और जंगल बनने में दशकों लगते हैं। इसलिए विकास के नाम पर होने वाली ऐसी पर्यावरणीय क्षति को जहां संभव हो, कम करना जरूरी है।
अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़े तो कुछ मील अधिक और कुछ घंटे अधिक यात्रा करना बेहतर है, बजाय इसके कि बड़ी संख्या में पूर्ण विकसित पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जाए।
मामला चतरा शहर के पास बनने वाले बाईपास से जुड़ा है, जो एनएच-99 (नया एनएच-22) और एनएच-100 (नया एनएच-522) को जोड़ेगा। याचिकाकर्ता सुरेश साव ने सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट में बदलाव की मांग की है।
उनका कहना है कि अलाइनमेंट बदलने से उनके भूखंड पर लगे करीब 300 पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सकता है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्थल का निरीक्षण कर यह रिपोर्ट देने को कहा था कि मौजूदा अलाइनमेंट में कितने पेड़ काटने पड़ेंगे और क्या सड़क का मार्ग बदलकर पेड़ों को बचाया जा सकता है।
निरीक्षण के बाद राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मौजूदा अलाइनमेंट के तहत वन क्षेत्र समेत परियोजना वाले इलाके में 13,681 पेड़ों की कटाई करनी होगी और ये सभी पूर्ण विकसित पेड़ हैं।
इस पर अदालत ने पेड़ों की संख्या को गंभीरता से लेते हुए अंतरिम आदेश जारी किया और कहा कि अगले आदेश तक इनमें से किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। पेड़ों की कटाई से जुड़ा सड़क निर्माण कार्य भी रुका रहेगा। हालांकि, एजेंसियां सड़क के अलाइनमेंट पर दोबारा विचार कर सकती हैं।