Ranchi News: करीब 19 साल पुराने ट्रेन में नशा देकर लूट के मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी पासो मंडल उर्फ बद्री मंडल को बरी कर दिया। अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) की गवाही नहीं होने से अभियोजन का मामला कमजोर पड़ गया, जिसका सीधा लाभ आरोपी को मिला। यह मामला जीआरपी (हटिया) थाना कांड संख्या 01/2007 से जुड़ा है। आरोपी को 15 अक्तूबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और वह तब से न्यायिक हिरासत में था।
क्या था मामला
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2007 में सूचक मॉर्या एक्सप्रेस ट्रेन से सफर कर रहे थे। यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने उन्हें चाय पिलाई, जिसे पीने के बाद वे बेहोश हो गए। जब उन्हें होश आया तो उनके पास से 10 हजार रुपए गायब थे। इस मामले में पहले ही एक अन्य आरोपी महाबीर मंडल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है।
गवाही नहीं, केस कमजोर
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष सिर्फ एक गवाह ही पेश कर सका। वहीं न तो जांच अधिकारी (आईओ) और न ही अन्य स्वतंत्र गवाह अदालत में पेश हुए। गवाह ने भी आरोपी की पहचान नहीं की, जिससे केस और कमजोर हो गया।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी करना पड़ा। अदालत के आदेश के बाद पासो मंडल उर्फ बद्री मंडल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया और उसकी रिहाई का आदेश जारी किया गया।