घटना के समय 15 साल 10 माह का होने का दावा, जन्मतिथि के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने घटना के समय खुद को नाबालिग बताकर किशोर घोषित करने की मांग करने वाले बंधु यादव की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति R. मुखोपाध्याय की अदालत ने 18 अगस्त को चतरा के विशेष न्यायाधीश (बाल अधिनियम) के 3 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की। बंधु यादव की ओर से दावा किया गया था कि घटना के समय उनकी उम्र 15 वर्ष 10 माह 25 दिन थी। उन्होंने जन्मतिथि 5 सितंबर 1994 बताते हुए कहा कि विद्यालय के प्रवेश रजिस्टर में हुई विसंगति केवल लिपिकीय भूल है और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत के रिकॉर्ड में सामने आया कि गिधौर के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, ऊपर टोला के प्रधानाध्यापक ने प्रवेश रजिस्टर के आधार पर जन्मतिथि 5 सितंबर 1994 बताई थी। लेकिन रजिस्टर में बंधु यादव का नाम क्रमांक 86 पर दर्ज था और उसी क्रमांक पर दिवाकर विश्वकर्मा का नाम भी दर्ज मिला। इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ। कोर्ट ने यह भी पाया कि बंधु यादव ने 4 अप्रैल 2007 को स्कूल छोड़ दिया था, लेकिन उनका स्थानांतरण प्रमाणपत्र करीब 11 साल बाद वर्ष 2018 में जारी किया गया। इन विसंगतियों के कारण निचली अदालत ने उम्र निर्धारण के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों में स्पष्ट विसंगतियां हैं और याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई 5 सितंबर 1994 की जन्मतिथि को सही जन्मतिथि के रूप में निश्चित नहीं माना जा सकता। इन परिस्थितियों में अदालत ने किशोर घोषित करने की मांग वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।