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Ranchi/H Court: IPS अमरजीत बलिहार के हत्यारे की फांसी पर हाईकोर्ट के दो जजों में मतभेद, एक ने किया बरी दूसरे ने सजा रखा बरकरार, समझे प

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By CourtNews Desk On 21 Jul, 2025
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Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार के हत्यारे दो हार्डकोर नक्सलियों सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू एवं सनातन बास्की उर्फ ताला दा को दुमका की निचली अदालत से मिली फांसी की सजा मामले में एक दूसरे से विपरीत आदेश पारित किया है. दो जजों की खंडपीठ में शामिल जस्टिस संजय प्रसाद ने दोनों सजायाफ्ता की फांसी की सजा को कंफर्म करने को लेकर राज्य सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा है, वहीं जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने दोनों सजायाफ्ता की फांसी की सजा के खिलाफ अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें बरी किया है. अब हाई कोर्ट की खंडपीठ के दोनों जजों के आदेश में मतभेद होने से यह मामला चीफ जस्टिस के पास जा सकता है. जहां इस मामले पर दूसरी बेंच सुनवाई कर सकती है. राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक विनीत कुमार वशिष्ठ ने पक्ष रखा था, वहीं दोनों सजायफ्ता की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र एस सिंह ने पक्ष रखा था.

हाई कोर्ट के जस्टिस संजय प्रसाद ने उक्त दोनों सजायाफ्ता की फांसी की सजा को कंफर्म को लेकर राज्य सरकार की अपील को हाईकोर्ट ने स्वीकृत कर लिया और दोनों सजायाफ्ता की सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी. जस्टिस संजय प्रसाद ने अपने आदेश में नक्सलियों के हमले में शहीद तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार के परिजनों को 2 करोड़ मुआवजा और पांच अन्य शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनों को 50-50 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है. इसके अलावा जस्टिस संजय प्रसाद ने शहीद तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार के पुत्र या पुत्री को डिप्टी एसपी / डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त करने के साथ-साथ उन्हें उम्र सीमा में छूट देने का भी आदेश दिया है। जबकि अन्य पांच शहीद पुलिस पर्सनल /कांस्टेबल के परिजनों को पुलिस विभाग में उनके एजुकेशन के हिसाब से फोर्थ ग्रेड पोस्ट या क्लास 4 के सिविल साइड सर्विसेज में पद पर नियुक्त करने का आदेश जस्टिस संजय प्रसाद ने दिया है। जस्टिस संजय प्रसाद ने अपने आदेश की प्रति झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव गृह विभाग, डीजीपी सहित अन्य आला अधिकारियों को भेजने का निर्देश भी दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद 3 फरवरी 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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दरअसल, वर्ष 2013 में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार चुनाव को लेकर एक बैठक में शामिल होने के लिए दुमका गए थे. इस दौरान लौटने के क्रम में नक्सलियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था. नक्सलियों के हमले में तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार सहित 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. एसपी अमरजीत बलिहार के हत्यारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दुमका कोर्ट के फांसी की सजा को चुनौती दी थी. इसमें कहा गया था कि निचली अदालत द्वारा दिया गया फैसला न्याय संगत नहीं है और बिना पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्हें फांसी की सजा दी गई है. दोनों ही दोषियों ने अपनी रिहाई की मांग भी अपील के माध्यम से की थी.

दुमका की अदालत ने सुनाई थी सजा

दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने तत्कालीन पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनाई थी. अदालत ने भादवि की धारा 307, 396,302 एवं आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनायी थी.

क्या कहा था निचली अदालत ने

न्यायालय ने जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि एक आईपीएस सहित छह जवानों की हत्या आपने की. ऐसे में आपको बाहर छोड़ना समाज के लिए घातक है. वहीं अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा सहित अर्थदंड की सजा सुनायी थी. इस केस में गिरफ्तार पांच अभियुक्तों- वकील हेम्ब्रम, लोबीन मुर्मू, सत्तन बेसरा, मारबेल मुर्मू और मारबेल मुर्मू-2 को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट को बरी कर दिया था.

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हत्याकांड में कुल 31 गवाहों का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया

हत्याकांड को लेकर भादवि की धारा 147, 148, 149, 326, 307, 379, 302, 427, 27 शस्त्र अधिनियम और 17 सीएलए के प्रवीर दा, ताला दा, दाउद, जोसेफ और 25 से 30 अज्ञात के खिलाफ कांड सं. 55/13 के तहत काठीकुंड थाने में ज्ञा दर्ज किया गया था.

इस केस में सात अभियुक्तों का ट्रायल चला था जिनमें प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू, वकील हेम्ब्रम, मारबेल मुर्मू, मारबेल मुर्मू-2, सत्तन बेसरा, सनातन बास्की उर्फ ताला दा शामिल थे. हत्याकांड में कुल 31 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किये गये.

2 जुलाई 2013 की है घटना

ज्ञात हो कि 2 जुलाई 2013 को दुमका में डीआइजी कार्यालय में बैठक के बाद एसपी अमरजीत बलिहार दो वाहनों से पाकुड़ लौट रहे थे. तभी काठीकुंड के आमतल्ला के पास पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार के काफिले पर घात लगाये नक्सलियों ने एके 47, इंसास रायफल और एएसएलआर से ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी. इसमें एसपी अमरजीत बलिहार के अलावा 5 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. नक्सली हमले में शहीद पुलिस जवान मनोज हेम्ब्रम दुमका जिले के गुहियाजोरी गांव, राजीव कुमार शर्मा और संतोष मंडल साहेबगंज जिला, अशोक कुमार श्रीवास्तव बिहार के बक्सर जिला और चंदन थापा बिहार के कटिहार जिले के रहनेवाले थे. नक्सली हमले में एसपी समेत कुल 6 जवान शहीद हुए थे और दो एके 47 रायफल, चार इंसास रायफल के अलावा दो पिस्टल और 647 गोलियां नक्सली अपने साथ लेते गये थे.

2003 बैच के आइपीएस थे बलिहार

अमरजीत बलिहार 2003 बैच के आइपीएस अधिकारी थे. वे झारखंड आर्ड पुलिस के कमांडेंट रह चुके थे. उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ काफी कड़े कदम उठाये थे. इसी वजह से पाकुड़ में पोस्टिंग के समय से ही वे नक्सलियों के निशाने पर थे.

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