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जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली समिति विकास दुबे मुठभेड़ की करेगी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दो माह में पूरी हो जांच

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 23 Jul, 2020
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vikash dubey and supreme court
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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे और उसके पांच कथित गुर्गों की मुठभेड़ में मौत की घटनाओं की न्यायिक जांच के लिये सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डा बीएस चौहान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति के गठन संबंधी मसौदे को बुधवार को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश तीन सदस्यीय जांच समिति की अधिसूचना के मसौदे को मंजूरी दी और कहा कि इसे अधिसूचित कर दिया जाये।

पीठ ने कहा कि इस जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर अपना काम शुरू कर देना चाहिए और दो महीने के अंदर इसे पूरी कर लेनी चाहिए। इस जांच समिति में इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस शशिकांत अग्रवाल और उप्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक केएल गुप्ता शामिल हैं।

इससे पहले, राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया था कि शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश डॉ. बलबीर सिंह चौहान कुख्यात अपराधी विकास दुबे की मुठभेड़ में हुई मौत के मामले की जांच के लिए गठित समिति का हिस्सा बनने पर सहमत हैं।

पीठ ने कहा कि यह समिति कानपुर के चौबेपुर थानांतर्गत बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों के मारे जाने और इसके बाद हुयी मुठभेड़ की घटनाओं की जांच करेगी।

इससे पहले, उप्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि जांच समिति उन परिस्थितियों की भी जांच करेगी जिसमें 65 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विकास दुबे को जमानत पर रिहा किया गया था।

मेहता ने इस जांच समिति की कार्य शर्तों को पढ़कर पीठ को सुनाया। उन्होंने कहा कि पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डा बी एस चौहान इस जांच समिति का हिस्सा बनने के लिये सहमत हो गये हैं।

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इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘हम जांच समिति के हाथ नहीं बांधना चाहते। जांच समिति के लिये कार्य शर्तें रखना उचित नहीं है। जांच समिति की जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए।’’

शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दुबे और उसके पांच कथित साथियों की मुठभेड़ में हुई मौत के मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

न्यायालय ने 20 जुलाई को इन याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि विकास दुबे मुठभेड़ की जांच के लिये गठित समिति में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को शामिल करने पर विचार किया जाये।

पीठ ने इन घटनाओं पर सख्त टिप्पणी करते हुये कहा था, ‘‘आपको एक राज्य के रूप में कानून का शासन बरकरार रखना है। ऐसा करना आपका कर्तव्य है।’’

न्यायालय ने इस दौरान यह टिप्पणी भी की थी कि गैंगस्टर विकास दुबे जैसे व्यक्ति के खिलाफ अनेक मामले दर्ज होने के बावजूद उसे जमानत मिलना संस्था की विफलता है। पीठ ने कहा था, ‘‘एक व्यक्ति, जिसे सलाखों के पीछे होना चाहिए था, उसे जमानत मिल जाना संस्था की विफलता है। हम इस तथ्य से स्तब्ध हैं कि अनेक मामले दर्ज होने के बावजूद विकास दुबे जैसे व्यक्ति को जमानत मिल गयी।’’

न्यायालय में दाखिल हलफनामे में राज्य के पुलिस महानिदेशक ने कहा था कि विकास दुबे और उसके गुर्गों ने तीन जुलाई को कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में घात लगाकर पुलिस की टुकड़ी पर अंधाधुंध गोलियां बरसायीं थी जिसमें पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गये।

इसके बाद से ही पुलिस विकास दुबे की तलाश कर रही थी।

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राज्य सरकार ने हलफनामे में यह भी बताया था कि गैंगस्टर विकास दुबे को मप्र के उज्जैन से कानपुर ला रही पुलिस की टुकड़ी को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी क्योंकि आरोपी ने भागने का प्रयास किया जिसमें वह मारा गया। विकास दुबे 10 जुलाई को कानपुर के निकट भौती में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

इन तमाम घटनाओं को लेकर न्यायालय में अलग अलग याचिकायें दायर की गयी हैं। पहली याचिका अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने दायर की है जिसमें इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और न्यायालय की निगरानी में पांच आरोपियों की मुठभेड़ में हत्या की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया हैं

अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी और एक अन्य ने भी अलग याचिका में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले और बाद में दस जुलाई को विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले और उत्तर प्रदेश में पुलिस-अपराधियों और नेताओं की साठगांठ की न्यायालय की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से इसकी जांच कराने तथा उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है।

इसके अलावा, कानपुर में पुलिस की दबिश के बारे में महत्वपूर्ण सूचना विकास दुबे तक पहुंचाने में कथित संदिग्ध भूमिका की वजह से निलंबित पुलिस अधिकारी ने भी याचिका दायर की है। पुलिस अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने अपनी पत्नी विनीता सिरोही के जरिये यह याचिका दायर की है। इसमें विनीता ने आशंका व्यक्त की है कि उसके पति को गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सकता है।

इस बीच, गैर सरकारी संगठन पीयूसीएल ने भी एक याचिका दायर कर विकास दुबे और उसके दो सहयोगियों की उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच विशेष जांच दल से कराने का अनुरोध किया है।

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Devesh Ananad

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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