एक लाख रुपये के दान पर आजीवन ट्रस्टी बनाने के प्रावधान पर उठाए सवाल, ट्रस्ट की संपत्ति और फंड की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग, अधिवक्ता गोकुल चंद ने दाखिल की याचिका
New Delhi/Ranchi News: झारखंड स्टेट बार काउंसिल से जुड़े लॉयर्स एकेडमी ट्रस्ट में स्थायी ट्रस्टी बनाए जाने के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। गोकुल चंद बनाम स्टेट ऑफ झारखंड मामले में 14 अक्टूबर 2026 को रिट याचिका दायर की गई। यह मामला डायरी नंबर 65002/2026 के तहत दर्ज हुआ है। याचिका में ट्रस्ट के गठन, उसके संचालन और स्थायी ट्रस्टी बनाए जाने की व्यवस्था पर संवैधानिक और संस्थागत सवाल उठाए गए हैं। याचिका का मुख्य मुद्दा वर्ष 2016 में तैयार ट्रस्ट डीड का क्लॉज 7(सी) है। याचिका के मुताबिक, इस प्रावधान के तहत एक लाख रुपये का योगदान या दान देने वाले डोनर ट्रस्टी को स्थायी ट्रस्टी बनाया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब बार काउंसिल एक वैधानिक और निर्वाचित संस्था है तथा उसके सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित होता है, तो क्या उसके निर्वाचित सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान बार काउंसिल से जुड़े ट्रस्ट में स्थायी ट्रस्टी बन सकते हैं।
2016 में पंजीकृत हुआ था ट्रस्ट डीड
याचिका में बताया गया है कि ‘झारखंड बार काउंसिल लॉयर्स एकेडमी फॉर कंटीन्यूइंग लीगल एजुकेशन ट्रस्ट’ का ट्रस्ट डीड 10 सितंबर 2016 को निष्पादित किया गया था। इसे 14 सितंबर 2016 को रांची में डीड नंबर 7095/813, बुक नंबर चार, वॉल्यूम छह और पृष्ठ संख्या 51 से 162 के रूप में पंजीकृत कराया गया था। याचिका में इसी ट्रस्ट डीड के प्रावधानों को चुनौती का आधार बनाया गया है।
बार काउंसिल की संपत्ति और निगरानी पर भी सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि ट्रस्ट का प्रधान कार्यालय झारखंड स्टेट बार काउंसिल के कार्यालय से जुड़ा है। इसके अलावा ट्रस्ट की भूमि, संपत्ति, फंड, बैंक खातों और नियमों के संबंध में भी बार काउंसिल की भूमिका का उल्लेख किया गया है। ऐसे में याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि ट्रस्ट के संचालन और उसकी संपत्तियों पर जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।
याचिका के अनुसार, मामला केवल एक निजी चैरिटेबल ट्रस्ट के गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिवक्ता समाज की संस्था, सार्वजनिक जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने स्थायी ट्रस्टी बनाने संबंधी प्रावधान को मनमाना और अवैध बताते हुए उसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 तथा संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत घोषित करने की मांग की है।
संपत्ति और फंड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग
याचिका में ट्रस्ट और लॉयर्स एकेडमी की संपत्ति, कॉर्पस फंड, अनुदान, दान, बैंक खातों, ऑडिट रिपोर्ट, प्रस्तावों, बैठकों के कार्यवृत्त और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा उनका खुलासा कराने की प्रार्थना की गई है। साथ ही इनका स्वतंत्र इन्वेंटरी और ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़े बीसीआई-पर्ल फर्स्ट ट्रस्ट मामले का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, वहां भी निर्वाचित संस्था के सदस्यों को स्थायी ट्रस्टी बनाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण या शैक्षणिक गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि ट्रस्ट के संचालन, संपत्ति और फंड को पारदर्शी तथा वैधानिक जवाबदेही के दायरे में रखना है। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। याचिका में उठाए गए आरोपों और सवालों पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

