Ranchi/Jamshedpur News: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी को स्पेशल मैरिज Act के तहत तलाक की डिक्री मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने जमशेदपुर की निचली अदालत (फैमिली कोर्ट) के उस एकतरफा (ex-parte) आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पत्नी की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि लगातार हो रहे शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न और शराब की लत के कारण मजबूरन पत्नी को घर छोड़ना पड़ा था, जो कि कानूनन क्रूरता और विवशता की श्रेणी में आता है।
क्या है पूरा मामला? जमशेदपुर के गोलमुरी (केबल टाउन) की रहने वाली R कुमारी की शादी 20 अक्टूबर 2010 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत R कुमार के साथ हुई थी। इस वैवाहिक जीवन से दंपती को एक बेटी (R कुमारी) और एक बेटा (R कुमार) हुए। आरोप है कि छोटे बेटे के जन्म के बाद पति शराब पीने का आदी हो गया और घरेलू हिंसा व मारपीट करने लगा। ससुर की मौत के बाद पति का रवैया और अधिक क्रूर हो गया तथा उसने नौकरी भी छोड़ दी। बच्चों की परवरिश और खुद के भरण-पोषण के लिए पत्नी ने नर्स की नौकरी शुरू की। पति द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने और 15 मार्च 2018 को जबरन घर से निकाल दिए जाने के बाद पीड़िता अपने बच्चों के साथ पिता के घर रहने को मजबूर हुई। इसके बाद उसने जमशेदपुर फैमिली कोर्ट में स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 27(1)(b) और (d) के तहत तलाक का मुकदमा दायर किया था। फैमिली कोर्ट ने पति के पेश न होने पर मुकदमा एकतरफा खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति को नोटिस मिलने के बावजूद वह न तो निचली अदालत में उपस्थित हुआ और न ही हाईकोर्ट में पेश हुआ। अदालत ने कहा कि पत्नी ने गोलमुरी थाने में पति द्वारा प्रताड़ित किए जाने की जानकारी दी थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई महिला घरेलू हिंसा और शराब के नशे में रोज-रोज के अत्याचार से तंग आकर अपने मायके रहने को मजबूर होती है, तो उसे ‘डिजर्टेशन’ (त्यागना) नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह पति की क्रूरता का परिणाम है।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों पक्ष वर्ष 2018 से अलग रह रहे हैं और अब इस रिश्ते को बचाना असंभव है, क्योंकि यह रिश्ता सिर्फ ‘मृत लकड़ी’ (dead wood) की तरह है। इन तमाम टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए दोनों का विवाह विच्छेद (तलाक) मंजूर कर लिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों का भरण-पोषण पाने और उनके उत्तराधिकार का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
नोटः इस तरह के मामले में पति-पत्नी और बच्चों के नाम परिवर्तित रहता है..उसे वास्तविक न समझे

