Ranchi News: सिरमटोली फ्लाईओवर के निर्माण के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ—चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर—ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित प्रतीत होती है, इसलिए हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। यह याचिका पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने दायर की थी।
सरकार का पक्ष:
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि सिरमटोली फ्लाईओवर का निर्माण कार्य साल 2022 में शुरू हुआ था और उस समय किसी ने आपत्ति नहीं की। इस परियोजना पर कई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो जनता का पैसा है।
महाधिवक्ता ने कहा कि फ्लाईओवर से एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरना स्थल को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई है।
याचिकाकर्ता का पक्ष:
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव की ओर से कहा गया कि सिरमटोली में स्थित सरना स्थल आदिवासी समुदाय का धार्मिक स्थल है, जहां त्योहारों के दौरान बड़ी भीड़ जुटती है। फ्लाईओवर के नीचे बने रैंप से आवागमन प्रभावित हो रहा है, और धार्मिक आयोजनों में कठिनाई बढ़ गई है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से रैंप हटाने और वैकल्पिक मार्ग बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
अदालत का निर्णय:
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि परियोजना काफी पहले शुरू हो चुकी है, जनता के पैसे से बनी है और इससे जनहित को बड़ा लाभ मिल रहा है। किसी संरक्षित धार्मिक स्थल को नुकसान भी नहीं हुआ है। इसलिए याचिका अस्वीकार्य है।

