School News: झारखंड के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अधिकार से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अधिकारियों को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय संवेदनशील और जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल भौतिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिए मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया।
कोर्ट ने राज्य सरकार और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) को स्कूलों की मौजूदा स्थिति, आवश्यक मरम्मत कार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों से संबंधित विस्तृत एवं सटीक ब्योरा जुटाकर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत यह भी देखेगी कि किन विद्यालयों में भवन की स्थिति गंभीर है और कहां शिक्षकों की कमी सबसे अधिक है। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।
कई स्कूलों में एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई
याचिका में पेश किए गए दस्तावेजों और आंकड़ों का हवाला देते हुए अदालत ने चिंता जताई कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कुछ विद्यालयों में महज एक शिक्षक के भरोसे शिक्षण व्यवस्था संचालित होने की स्थिति सामने आई है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ विद्यालयों के सुचारु संचालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
खंडपीठ ने स्कूल भवनों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। कई विद्यालयों में जर्जर और असुरक्षित भवनों में कक्षाएं संचालित होने की बात सामने आई है। अदालत ने कहा कि ऐसे भवनों में बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों का दायित्व है कि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
जर्जर स्कूलों का तत्काल निरीक्षण करने का आदेश
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिका में जिन विद्यालयों का उल्लेख किया गया है, उनका तत्काल भौतिक निरीक्षण कराया जाए। जिन स्कूल भवनों में तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना विलंब आवश्यक कार्य शुरू कराया जाए। अदालत ने साफ किया कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करना जरूरी है।

