New Delhi/Ranchi News: वर्ष 2015 की झारखंड पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 888 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने झारखंड सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया है कि लिखित, शारीरिक और मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रहे 888 अभ्यर्थियों के मामलों पर अधिकतम आयु सीमा में छूट देकर पुनर्विचार किया जाए।
अदालत ने इन अभ्यर्थियों के लिए नए सिरे से शारीरिक दक्षता परीक्षा और चिकित्सीय परीक्षण कराने का भी आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पार किए थे, लेकिन 29 मई 2017 को जारी अंतिम परिणाम में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि महिला और होमगार्ड श्रेणी में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण कई पद खाली रह गए थे। अभ्यर्थियों ने दलील दी कि भर्ती नियमावली के अनुसार खाली बचे होमगार्ड पदों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रिकॉर्ड में दर्ज 888 अभ्यर्थियों के मामलों पर ही विचार होगा और कोई नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। चयनित होने पर अभ्यर्थियों को वर्तमान कांस्टेबलों की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान मिलेगा, जबकि आपसी वरिष्ठता 2015 की मेरिट सूची के आधार पर तय होगी। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वर्तमान में कांस्टेबल के 2,380 पद रिक्त हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।