Ranchi: रांची, 12 जुलाई — झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस एसएन प्रसाद ने कहा कि किसी भी संस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए बजट निर्माण प्राथमिक और अनिवार्य कार्य होता है। उन्होंने कहा कि बिना वित्तीय प्रबंधन के न तो परिवार चल सकता है, न ही संस्था। इसलिए सभी डालसा सचिवों को बजट तैयार करने की पूर्व तैयारी कर लेनी चाहिए, जिससे वर्ष के अंत में जल्दबाजी में पैसा खर्च करने जैसी स्थिति से बचा जा सके। जस्टिस प्रसाद शनिवार को झालसा में आयोजित एकाउंट और ऑडिट प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर राज्यभर के डालसा सचिवों और न्यायिक पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट का उपयोग पूरी पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ होना चाहिए, क्योंकि यह जनता के टैक्स का पैसा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बजट निर्माण के समय पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) से राय ली जाए, क्योंकि वे दूरदराज के गांवों में जाकर समस्याओं की वास्तविक स्थिति से परिचित होते हैं। इससे बजट को जमीनी हकीकत के अनुसार प्राथमिकता दी जा सकती है। जस्टिस प्रसाद ने स्पष्ट किया कि बजट मिलते ही उसका उपयोग दुर्घटना बीमा, दुष्कर्म पीड़िता मुआवजा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं में तत्काल और नियोजित रूप से किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निधियों के उपयोग में लापरवाही या मनमानी बरती गई, तो वित्तीय अनियमितता संस्था की विफलता मानी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मद को लेकर कोई भ्रम या संदेह हो तो तत्काल झालसा से मार्गदर्शन लिया जाए। कार्यक्रम में हाई कोर्ट के जस्टिस ए.के. राय, रजिस्ट्रार जनरल, झालसा सचिव रंजना अस्थाना, दीपक कुमार साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

