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Ranchi/H Court: पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के शपथपत्र पर जताई नाराजगी

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 20 Nov, 2025
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Ranchi/H Court: पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के शपथपत्र पर जताई नाराजगी
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Ranchi: पाकुड़ जिले में पैनम कोल कंपनी द्वारा कथित अवैध खनन के गंभीर आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस रलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने टिप्पणी की कि सरकार यह स्पष्ट करने में पूरी तरह विफल रही है कि दुमका के प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह नया और विस्तृत शपथपत्र दाखिल करे, जिसमें जांच के बाद उठाए गए सभी कदमों को विस्तार से बताया जाए।

अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा दाखिल किए गए शपथपत्र में केवल इतना उल्लेख किया गया था कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पाकुड़ उपायुक्त को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि “शो-कॉज नोटिस जारी करने के बाद क्या कार्रवाई की गई?” परंतु सरकारी अधिवक्ता अदालत को इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सकीं। इससे नाराज होकर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार अदालत को जानकारी देने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।

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इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के तहत किए गए खर्च का विवरण भी अधूरा और अस्पष्ट है। अदालत ने निर्देश दिया कि अगला शपथपत्र सटीक, पूर्ण एवं प्रमाणिक विवरण के साथ दाखिल किया जाए। सरकार की ओर से पूर्व में बताया गया था कि पैनम कोल कंपनी के खिलाफ 118 करोड़ रुपये की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस दर्ज किया गया है। वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने अदालत को बताया कि मामला केवल रॉयल्टी बकाया का नहीं बल्कि 999 करोड़ रुपये के अवैध खनन का है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि कंपनी ने निर्धारित लीज सीमा से अधिक कोयले का उत्खनन किया है, इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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याचिका में आरोप है कि वर्ष 2015 में पाकुड़ और दुमका में खनन लीज मिलने के बाद कंपनी ने बड़े पैमाने पर अतिरिक्त कोयला निकाला, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि हुई। साथ ही, यह भी सवाल उठाया गया है कि अवैध उत्खनन की जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने सरकार से स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत, पारदर्शी और ठोस जवाब दाखिल करना अनिवार्य होगा। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जिसमें राज्य सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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