Prisoners: सजा पुनरीक्षण बोर्ड की कार्यवाही और छोड़े गए कैदियों के बारे में ब्योरा दे सरकार

Ranchi: Prisoners झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक की कार्यवाही और अब तक छोड़े गए कैदियों का ब्योरा मांगा है। अदालत ने बोर्ड की ओर से कैदियों को रिहा करने और आवेदन अस्वीकृत करने का आधार भी जानकारी मांगी है।

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने एक पत्र पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कैदियों को रिहा करने के लिए बनाई गई नीति भी मांगी है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। इसको लेकर अदिति राज नाम के एक व्यक्ति ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है।

अदालत ने अदिति राज नामक एक व्यक्ति की ओर से लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया। पत्र में कहा गया था कि उनके पिता 16 साल से होटवार जेल में बंद है। राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक हर तीन माह में होनी चाहिए।

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लेकिन बोर्ड की बैठक नियमित नहीं होती। बोर्ड में सभी आवेदनों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया जा रहा है। इसमें भेदभाव किए जाता है। उनके पिता का मामला सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक में नहीं गया। जबकि इससे कम अवधि वालों का प्रस्ताव बोर्ड में रखा गया और उन्हें रिहा भी कर दिया गया है।

इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि बोर्ड की बैठक होते रहती है। प्रार्थी का मामला भी बोर्ड में रखा गया था, लेकिन बोर्ड ने उसे रिहा नहीं करने का निर्णय लिया था। नीति के अनुसार जघन्य अपराध की श्रेणी रखी गई है। अगर मामला उक्त श्रेणी में आता है, तो उन्हें रिहा नहीं किया जाता है। इसके बाद अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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