Ranchi news: झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी सिंदरी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों को वर्ष 2019 से करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति देने का निर्देश दिया है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रवि शंकर प्रसाद एवं अन्य की याचिका पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर पदोन्नति अधिसूचित करने तथा पात्रता की तिथि से बकाया वेतन समेत सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया।
प्रमोशन सूची में था नाम
याचिकाकर्ताओं में रवि शंकर प्रसाद, राजेन कुमार नायक, उज्ज्वल कुमार नायक और अभय ज्ञान पी कुजूर शामिल हैं। सीएएस के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया 25 जून 2019 को शुरू हुई थी। कॉलेज स्तर पर स्क्रीनिंग के बाद 16 जनवरी 2020 को पात्र उम्मीदवारों के नाम विभाग को भेजे गए।
पांच फरवरी 2021 को स्क्रीनिंग कमेटी गठित हुई। बाद में कमेटी में डायरेक्टर, टेक्निकल एजुकेशन के शामिल नहीं होने की आपत्ति उठी और 18 फरवरी 2022 को कमेटी के पुनर्गठन का निर्देश दिया गया। इसके बाद भी प्रक्रिया आगे बढ़ी और 20 अगस्त 2022 को इंटरव्यू के बाद चयन समिति ने उम्मीदवारों की अनुशंसा कर दी।
दो साल मामला रहा लंबित
कोर्ट ने कहा कि एआईसीटीई रेगुलेशन 2012 के तहत स्क्रीनिंग सह इवैल्यूएशन कमेटी की अनुशंसा के साथ चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। विभाग को इसके बाद केवल निर्णय लेकर पदोन्नति अधिसूचित करनी थी, लेकिन मामला करीब दो साल लंबित रहा।
अदालत ने चयन समिति की अनुशंसा में तीन याचिकाकर्ताओं के नाम के सामने रिकमेंड/नॉट रिकमेंड कॉलम खाली रहने को मानवीय त्रुटि माना। हालांकि कवरिंग पेज पर 17 उम्मीदवारों की पदोन्नति की अनुशंसा की गयी थी, जिनमें तीनों याचिकाकर्ता शामिल थे। चौथे के नाम के सामने रिकमेंड स्पष्ट था।
सरकार की दलील खारिज
राज्य सरकार ने 2024 के नये झारखंड टेक्निकल एजुकेशन सर्विस रूल्स के आधार पर नयी चयन प्रक्रिया की बात कही थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि नियमों के क्लॉज 18 में पूर्व की कार्रवाई सुरक्षित है। इसलिए 2019 में शुरू हुई और 2022 में अनुशंसा के साथ पूरी सीएएस प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की तकनीकी गलतियों का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए। चारों को वर्ष 2019 से ग्रेड पे 8000 से 9000 रुपये तथा पदोन्नति का लाभ मिलेगा। साथ ही बकाया वेतन और अन्य परिणामी लाभ भी दिये जाएंगे।

