पॉक्सो की विशेष अदालत का ऐतिहासिक फैसला: कोर्ट ने कहा— ‘ऐसे जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड से कम कुछ मंजूर नहीं’
Ranchi News: सात साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद निर्मम हत्या करने के मामले में पॉक्सो (POCSO) मामलों की विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी करार दिए गए अभियुक्त नेसार अंसारी को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। यह सनसनीखेज मामला रांची के रातू थाना कांड संख्या XXX/2020 से संबंधित है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए गत 10 अगस्त को नेसार अंसारी को दोषी ठहराया था। दोषी करार दिए जाने के बाद से ही अभियुक्त लगातार जेल में बंद है। अभियोजन की ओर से एपीपी पल्लवी सिंह ने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया था।
‘फांसी से कम कोई सजा नहीं हो सकती’
सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मासूम बच्ची के साथ जिस प्रकार का बर्बर और जघन्य अपराध किया गया है, उसके लिए फांसी से कम सजा किसी भी सूरत में नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में समाज में कड़ा संदेश जाना बेहद जरूरी है।
क्या था पूरा मामला?
यह दिल दहला देने वाली घटना वर्ष 2020 में रांची के रातू थाना क्षेत्र में घटी थी:
- मासूम की हत्या और शव ठिकाने लगाना: अभियुक्त नेसार अंसारी ने सात साल की मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया और दुष्कर्म के बाद उसकी नृशंस हत्या कर दी। साक्ष्य छिपाने की नीयत से उसने मासूम के शव को एक बोरे में बंद कर दिया और पास के एक खेत में फेंक दिया।
- ग्रामीणों का आक्रोश: खेत में बोरे से शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और स्थानीय ग्रामीण बेहद आक्रोशित हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह उग्र ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया था।
- जनाजे में शामिल हुए थे पुलिस अफसर: मासूम के प्रति संवेदनशीलता और संवेदना व्यक्त करते हुए उस समय के डीआईजी सह तत्कालीन ग्रामीण एसपी नौशाद आलम खुद बच्ची के जनाजे में शामिल हुए थे और उसे कंधा दिया था।
न्याय की जीत
घटना के बाद से ही लगातार न्यायिक प्रक्रिया जारी थी। पॉक्सो कोर्ट द्वारा अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता के परिवार और स्थानीय लोगों ने अदालत के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है।

