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झारखंड हाईकोर्ट का आदेश, रांची के बड़ा तालाब, डैमों से हटाएं अतिक्रमण

इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिक्रमण हटाने या जलाशयों को प्रदूषण से बचाने के लिए यदि कोई दिक्कत आए तो इससे कोर्ट को अवगत कराया जाए।

रांचीः रांची के डैमों, तालाबों और अन्य जलाशयों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश उपायुक्त और रांची नगर निगम के आयुक्त को दिया है। अदालत ने कहा है कि किसी भी जलाशयों के किनारे अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।

डैमों, तालाबों में नाली, अस्पताल और उद्योगों का पानी प्रवेश नहीं करे यह सुनिश्चित करना होगा। इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिक्रमण हटाने या जलाशयों को प्रदूषण से बचाने के लिए यदि कोई दिक्कत आए तो इससे कोर्ट को अवगत कराया जाए।

कोर्ट उचित आदेश पास करेगा। जलाशयों को संरक्षित करने को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नाराणय प्रसाद की अदालत ने यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान रांची के उपायुक्त और नगर आयुक्त अदालत में हाजिर भी हुए थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रांची राजधानी है, लेकिन रांची में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं की गयी है, ताकि जलाशयों को संरक्षित किया जा सके। ड्रेनेज व्यवस्था समुचित तरीके से नहीं की गयी।

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इससे प्रतीत होता है कि यहां बिना विजन और योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं किया जा रहा है। हर तालाब और डैम के किनारे अतिक्रमण है। लेकिन जब तक कोर्ट आदेश नहीं देता, कोई कार्रवाई नहीं होती।

अदालत ने कहा की अतिक्रमण हटाने को प्राथमिकता पर लेना होगा और इसकी शुरुआत भी करनी होगी। इसके लिए इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। फायर ब्रिगेड के वाहन सभी स्थानों पर सुगमता से पहुंचे यह भी सुनिश्चित करना होगा।

नालियों का निर्माण समुचित तरीके से हो और उनका दूषित जल किसी भी जलाशय को प्रदूषित नहीं करे इसे तय करना होगा। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बताया गया कि बड़ा तालाब में बगल के एक अस्पताल का पानी प्रवेश करता है।

तालाब किनारे वाहन खड़ा कर सफाई की जाती है। इससे दूषित जल तालाब में गिरता है और पानी प्रदूषित हो रहा है। इसका नगर निगम की ओर से विरोध किया गया। निगम की ओर से कहा गया कि बड़ा तालाब में किसी वाहन की सफाई अब नहीं होती है।

तालाब की सफाई की गयी है और नालियों का पानी प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन और नगर निगम ने गंभीरता नहीं दिखायी है।

डैमों किनारे अभी भी अतिक्रमण हो रहे हैं। डैम के कैचमेंट एरिया में निर्माण कार्य जारी है। यहां बने आवासों का गंदा पानी भी डैमों में जा रहा है इससे जलाशय प्रदूषित हो रहे हैं।

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