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महाराष्ट्र सरकार ने स्टैन स्वामी की मेडिकल रिपोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट को सौंपी

एल्गार परिषद-माओवादी रिश्ते के आरोपी दिवंगत स्टैन स्वामी (Stan Swami) का महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने मेडिकल रिकॉर्ड बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) को सौंप दिया गया।

Maharashtra: एल्गार परिषद-माओवादी रिश्ते के आरोपी दिवंगत स्टैन स्वामी (Stan Swami) का महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने मेडिकल रिकॉर्ड बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) को सौंप दिया गया। एल्गार परिषद व माओवादी रिश्ते के आरोपी 84 वर्षीय स्वामी की पिछले हफ्ते न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी।

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस जेएन जमादार की पीठ को बताया गया कि जब स्टैन स्वामी एक विचाराधीन कैदी के तौर पर तलोजा जेल से लाए गए थे, उस समय के संपूर्ण चिकित्सा दस्तावेज कोर्ट में जमा करा दिया गया है।

करीब 300 पृष्ठों के चिकित्सकीय दस्तावेज में उनके पोस्टमार्टम तक की रिपोर्ट संलग्न की गई है। राज्य सरकार के अलावा मुंबई के होली फैमिली अस्पताल ने भी स्वामी के उपचार की जानकारी मुहैया कराई है। 5 जुलाई को इसी अस्पताल में स्टैन स्वामी की मृत्यु हुई थी। चूंकि स्वामी की मौत न्यायिक हिरासत में हुई है, इसलिए मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।

इसे भी पढ़ेंः राष्ट्रीय खेल घोटालाः अभियुक्त आरके आनंद की अग्रिम जमानत पर सुनवाई टली, 16 जुलाई को होगी सुनवाई

बता दें कि दो दिन पहले ही शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी स्टैन स्वामी की हिरासत में मौत को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता, भले ही माओवादी ‘कश्मीरी अलगाववादियों से ज्यादा खतरनाक’ हों।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में राउत ने  मामले में हैरानी जताई। उन्होंने लिखा कि स्वामी (84) संभवत: भारत में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति होंगे, जो आतंकवाद के आरोपी थे। उनका हाल में मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था। स्वास्थ्य आधार पर उनकी जमानत का मामला अदालत में लंबित था। 

‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत ने कहा, ’84 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति से डरी सरकार चरित्र में तानाशाह है, लेकिन दिमाग से कमजोर है। एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में वरवर राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और अन्य की गिरफ्तारी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एल्गार परिषद की गतिविधियों का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन बाद में जो हुआ उसे ‘स्वतंत्रता पर नकेल कसने की एक साजिश’ कहा जाना चाहिए।

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