Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने मोरहाबादी स्थित सेना के कब्जे वाली जमीन को लेकर 15 वर्ष पुराने फैसले को पलट दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में तथ्यों को लेकर गंभीर विवाद हैं, जिनका निपटारा रिट याचिका के जरिए नहीं बल्कि सिविल न्यायालय में किया जाना चाहिए। खंडपीठ ने वर्ष 2009 में पारित उस एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेना को 4.46 एकड़ जमीन मूल मालिक के उत्तराधिकारी को लौटाने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश शनिवार को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
ईडी ने दस्तावेजों को बताया फर्जी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता जयंत कर्नाड द्वारा पेश किए गए जमीन से संबंधित दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। ईडी की जांच में दावा किया गया कि स्वामित्व के आधार बने राजस्व अभिलेख और म्यूटेशन रजिस्टर जाली हैं। फॉरेंसिक जांच में भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
1946 से सेना के कब्जे में है जमीन
मोरहाबादी की यह जमीन वर्ष 1946 से सेना के कब्जे में है। मूल मालिक बीएम लक्ष्मण राव थे, जिनके बाद उनके पुत्र बीएम मुकुंद राव को यह जमीन मिली। मुकुंद राव की 1998 में बिना वसीयत मृत्यु हो गई थी। जयंत कर्नाड ने खुद को उनकी बहन का पुत्र बताते हुए एकमात्र उत्तराधिकारी होने का दावा किया था।
सेना के कब्जे वाली जमीन बेचने का आरोप
ईडी ने यह भी खुलासा किया कि जयंत कर्नाड ने वर्ष 2019 में इसी जमीन को 13 अन्य लोगों को बेच दिया, जबकि जमीन सेना के कब्जे में थी। इस पूरे मामले में ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू है।

