Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए डॉक्टर दंपति के विवाह को भंग कर दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपीलार्थी-पत्नी डॉ. आर कुमारी(नाम बदला हुआ) की अपील को स्वीकार करते हुए हजारीबाग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें तलाक की अर्जी ठुकरा दी गई थी। उच्च न्यायालय ने पति के अवैध संबंधों और गंभीर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना को क्रूरता मानते हुए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत तलाक की डिक्री मंजूर कर ली है।
मामला यह था कि दोनों की शादी 24 फरवरी 2018 को हजारीबाग के चर्ही में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। दोनों चिकित्सा पेशे से जुड़े हैं, जहां पति डॉ. पी कुमार(नाम बदला हुआ) सोनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टुंडी (धनबाद) में और पत्नी बीसीसीएल, धनबाद में कार्यरत थीं। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया और 5 सितंबर 2019 से दोनों अलग रहने लगे। पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति का एक विधवा महिला के साथ अवैध संबंध था। विरोध करने और बॉन्ड भरने के बावजूद रवैया नहीं बदला, और प्रताड़ना के कारण उसे स्लिप-डिस्क जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।
निचली अदालत द्वारा राहत न मिलने पर पत्नी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद पाया कि पारिवारिक अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया था। खंडपीठ ने कहा कि 2019 से दोनों का अलग रहना और पति का विवादास्पद आचरण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वैवाहिक बंधन का विश्वास पूरी तरह टूट चुका है। ऐसे में जबरन रिश्ता बनाए रखना मुमकिन नहीं है। अदालत ने पत्नी को भरण-पोषण (Alimony) के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन देने की स्वतंत्रता भी दी है।

