Ranchi News: हरमू स्थित हाउसिंग बोर्ड के एक प्लॉट की खरीद-फरोख्त से जुड़े धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के मामले में 22 वर्ष बाद पीड़िता बिंदु शर्मा को न्याय मिला है। सिविल कोर्ट रांची के अपर न्यायायुक्त की एक अदालत ने दोषी करार दिए गए अभियुक्त ब्रज किशोर झा की क्रिमिनल अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन किया है और मामले में धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं। मामला वर्ष 2003 का है। बिंदु शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अभियुक्त ब्रज किशोर झा और मो. अख्तर ने हरमू स्थित हाउसिंग बोर्ड के एक प्लॉट को बेचने का झांसा देकर उनसे 4.88 लाख रुपये लिए। इसके बाद न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई और न ही ली गई राशि लौटाई गई। लंबी सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2018 में ब्रज किशोर झा को धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का दोषी ठहराते हुए तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
इस फैसले को अभियुक्त ने 2018 में ही अपील के माध्यम से चुनौती दी थी, जिस पर करीब सात वर्ष बाद फैसला आया। अपील की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से दलील दी गई कि समझौता पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, उन्होंने कोई राशि नहीं ली और पूरा लेन-देन किसी अन्य व्यक्ति ने किया था। वहीं अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि शुरू से ही आरोपी की नीयत धोखाधड़ी की थी। हाउसिंग बोर्ड में जमा दस्तावेज, हलफनामे और धनराशि के लेन-देन से अभियुक्त की संलिप्तता स्पष्ट होती है। अदालत ने अभियोजन की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि साक्ष्य आरोपी के खिलाफ हैं। अपील खारिज करते हुए अदालत ने अभियुक्त को सजा भुगतने के लिए एसडीजेएम कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।