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हाई कोर्ट ने कहा- आदेश के बाद भी जलस्रोतों से क्यों नहीं हट रहा अतिक्रमण

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 08 Apr, 2021
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Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में रांची के बड़ा तालाब सहित अन्य जलस्रोतों के संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त करने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से वर्ष 1929 के रांची के जलस्रोतों का नक्शा उपलब्ध कराने को कहा है। पूछा है कि क्या किसी भी तरह से यह पता लगाया जा सकता है कि उस दौरान रांची में कितने जलस्रोत थे। कितने गायब हो गए और कितनों का क्षेत्रफल कम हो गया है।

मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि धुर्वा, कांके डैम और बड़ा तालाब सहित अन्य जलस्रोतों पर किए गए अतिक्रमण को चिन्हित कर नोटिस दिया गया और कुछ जगहों पर अतिक्रमण हटाया गया है। अदालत ने डोरंडा स्थित हिनू नदी के किनारे हुए अतिक्रमण हटाने की के बारे में जानकारी मांगी। नगर निगम ने बताया कि नियमानुसार नदी के 15 मीटर के अंदर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है।

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हिनू नदी के पास अतिक्रमण कर चारदीवारी बनाई गई थी। इसके लिए 82 लोगों को नोटिस दिया गया है। साथ ही दीवार का कुछ हिस्सा तोड़ा गया है। इस पर अदालत ने कहा कि सिर्फ कुछ हिस्सा क्यों तोड़ा गया है। क्या उसके बाद की चारदीवारी अवैध नहीं है। कुछ हिस्सा तोड़े जाने से प्रतीत होता है कि रांची नगर निगम किसी को बचना चाहती है। इस दौरान अधिवक्ता राजीव कुमार की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश के बाद भी हिनू नदी के किनारे मिट्टी भरकर रातों रात नया निर्माण कर दिया गया।

जब नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची तो उनके साथ स्थानीय लोगों की झड़प भी हुई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए रांची उपायुक्त को ऑनलाइन हाजिर होने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत ने उपायुक्त से पूछा कि अतिक्रमण हटाने जाने वाली टीम को पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल क्यों नहीं उपलब्ध कराए गए। अगर वहां पर कर्मचारियों के साथ हादसा हुआ तो अब तक प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज कराई गई है।

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उपायुक्त ने कहा कि नगर निगम की टीम को मजिस्ट्रेट और पर्याप्त सुरक्षा बल दिए गए थे, लेकिन घटना को लेकर अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। इस दौरान अदालत में शहरी विकास सचिव, जूलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पदाधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पदाधिकारी, रांची उपायुक्त, एसएसपी, ट्रैफिक एसपी ऑनलाइन हाजिर हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के दौरान भी सभी अधिकारियों को अदालत में वीसी के जरिए हाजिर रहने का आदेश दिया है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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