बार-बार बयान बदलने पर हाईकोर्ट ने डीसी को लगाई फटकार, कहा- चलाया जा सकता है अवमानना का मामला

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने रांची उपायुक्त की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

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Jharkhand High Court

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने रांची उपायुक्त की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि उनका बार-बार बयान बदलना अवमानना के दायरे में आता है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करने पर उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जा सकता है। हालांकि अदालत ने अवमानना का मामला शुरू करने का आदेश नहीं दिया है।

दरअसल, अरगोड़ा अंचल में एक जमीन के मामले में रांची उपायुक्त ने तीन शपथ पत्र में अलग-अलग जानकारी दी है। इसी से कोर्ट नाराज था। सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। दरअसल, सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाया गया कि प्लाट नंबर 430 और खाता संख्या 205 अतिक्रमण किया गया है।

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इस मामले में पहले अदालत ने जानकारी मांगी थी, तो उपायुक्त की ओर से कहा गया कि उक्त जमीन रैयती है। फिर कहा कि इस जमीन का सेटलमेंट कर दिया गया है। जब अदालत ने सेटलमेंट की जानकारी मांगी, तो फिर डीसी ने कहा कि उक्त जमीन पर अतिक्रमण किया गया है और उसे अभी हटाया नहीं गया है। कोर्ट ने कहा कि उपायुक्त तीन बार अपना बयान कैसे बदल सकते हैं।

कोर्ट ने पूछा कि उक्त जमीन पर किसका भवन बना है और बिना सीओ के सत्यापन के उपायुक्त कैसे कह सकते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने तुरंत उन्हें आनलाइन हाजिर होने को कहा। डीसी ने कोर्ट में हाजिर होकर कहा कि वह एक बैठक में है। इसके बाद अदालत ने उन्हें बैठक में शामिल होने की छूट प्रदान कर दी। इस दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या यहां की जमीनों के रिकार्ड का डिजिटाइज किया गया है या नहीं। क्योंकि यह बहुत आवश्यक है। इससे फ्राड को रोकने में सहायता मिलेगी।