Ranchi News: नगड़ी थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुई फायरिंग की घटना से जुड़े बहुचर्चित मामले में सिविल कोर्ट रांची के अपर न्यायायुक्त-5 शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने आरोपी बलिया मुंडा उर्फ बलिया पाहन को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। मामला नगड़ी थाना कांड संख्या XX/2019 का है। प्राथमिकी के अनुसार 2 अक्टूबर 2019 को मनोज मिंज अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान सेम्बो गांव के पास बाइक सवार तीन युवकों ने उन पर गोली चला दी। गोली लगने से वे घायल हो गए। आरोप था कि इसके बाद हमलावरों ने पिस्तौल के बट से उनके सिर पर भी हमला किया। घटना के बाद पुलिस ने बलिया मुंडा उर्फ बलिया पाहन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष केवल दो गवाहों को ही प्रस्तुत कर सका। इनमें से एक गवाह सरजीत केरकेट्टा को अभियोजन ने ही शत्रुतापूर्ण (होस्टाइल) घोषित कर दिया, जबकि दूसरे गवाह महादेव नागडुवार ने अदालत में आरोपी की पहचान नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि गोली चलने की आवाज सुनकर घटनास्थल पहुंचे थे और घायल मनोज मिंज को देखा था। अदालत ने अपने फैसले में विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले के सबसे महत्वपूर्ण गवाह सूचक मनोज मिंज और अनुसंधानकर्ता (आईओ) एएसआई रंजीत पिंगुवा की गवाही ही नहीं कराई गई। इससे अभियोजन का पूरा मामला कमजोर हो गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्राथमिकी अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई थी, लेकिन जांच के दौरान आरोपी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) भी नहीं कराई गई।
कोर्ट ने माना कि जब कोई भी गवाह आरोपी की पहचान नहीं कर सका, आईओ और सूचक का परीक्षण नहीं हुआ तथा अभियोजन के पास आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं था, तब दोषसिद्धि संभव नहीं है। इन्हीं कारणों से अदालत ने बलिया मुंडा उर्फ बलिया पाहन को बरी करते हुए उनके जमानत बंधपत्र से भी मुक्त कर दिया।

