Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बिजली आपूर्ति समझौता समाप्त (Terminate) होने के बाद भी यदि बिजली वितरण निगम (JBVNL) उपभोक्ता की सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि रोक कर रखता है, तो उसे वास्तविक भुगतान की तिथि तक उस पर ब्याज देना होगा। न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने आरुष मेटल कास्टिंग लिमिटेड (आदित्यपुर, जमशेदपुर) की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
मामला क्या था? याचिकाकर्ता ने मार्च 2018 में अपना बिजली कनेक्शन सरेंडर कर दिया था और समझौता समाप्त हो गया था। बकाया बिजली बिलों के समायोजन के बाद कंपनी का लगभग 51.53 लाख रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट जेबीवीएनएल के पास बचा हुआ था। निगम ने यह राशि अक्टूबर 2021 में लौटाई, लेकिन ब्याज की गणना केवल 31 मार्च 2018 (समझौता समाप्ति की तिथि) तक ही की। इसके खिलाफ कंपनी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत की टिप्पणी और आदेश
विनियम (Regulations) का हवाला: अदालत ने ‘झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड) रेगुलेशन 2015’ के क्लॉज 8.2.15 और 8.2.16 का हवाला देते हुए कहा कि समझौता समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करना अनिवार्य है।
देरी पर ब्याज अनिवार्य: यदि भुगतान में देरी होती है, तो संबंधित वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल को लागू एसबीआई (SBI) बेस रेट के आधार पर ब्याज देय होगा।
निगम का फैसला रद्द: अदालत ने जेबीवीएनएल द्वारा 2017-18 तक ही ब्याज देने के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि अक्टूबर 2021 में मूल राशि के भुगतान की वास्तविक तिथि तक का ब्याज कैलकुलेट कर तीन महीने के भीतर कंपनी को भुगतान किया जाए।

