Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के करीब 30 साल पुराने मामले में दोषी पति शंकर भुइयां की सात साल की सजा बरकरार रखते हुए उसकी आपराधिक अपील खारिज कर दी। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को दो माह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर कर शेष सजा काटने का निर्देश दिया है। सरेंडर नहीं करने पर निचली अदालत को गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।मामला धनबाद के तिसरा थाना क्षेत्र का है। शंकर भुइयां की शादी अप्रैल 1992 में मुनवा देवी से हुई थी। अभियोजन के अनुसार शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर मुनवा को प्रताड़ित किया जाता था। पति पर शराब पीकर मारपीट करने और दूसरी महिला से संबंध रखने का भी आरोप था। 27 अक्टूबर 1996 को मायके वालों को जानकारी मिली कि मुनवा को जलने के बाद धनबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचने पर उसकी मौत की जानकारी मिली।
ट्रायल कोर्ट ने 16 जून 2004 को शंकर भुइयां को आईपीसी की धारा 304बी/34 के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला की शादी के सात वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में जलने से मौत हुई और गवाहों की गवाही से दहेज के लिए प्रताड़ना भी साबित हुई। इसलिए धारा 113बी, साक्ष्य अधिनियम के तहत दहेज हत्या की कानूनी धारणा लागू होती है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष इस धारणा को rebut नहीं कर सका। सह-अपीलकर्ता मुनवई देवी की अपील 2019 में उसकी मृत्यु के बाद समाप्त हो चुकी है।