Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 के फायरिंग मामले में दोषी ठहराए गए मदन मरांडी को बड़ी राहत देते हुए बरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष की गंभीर कमियों के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ दिया तथा दुमका की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की ठोस पहचान और अपराध में उसकी संलिप्तता साबित करने में असफल रहा है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दरअसल, सत्र न्यायालय, दुमका ने आरोपी मदन मरांडी को हत्या के प्रयास में 10 साल और अवैध हथियार के मामले में 2 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए 18 सितंबर 2003 को हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।
क्या था मामला
अभियोजन के अनुसार, 16 अगस्त 1999 की रात करीब 11 बजे सूचक सुनीलाल हांसदा पर उस समय गोली चलाई गई थी, जब वह अपने घर में सो रहा था। आरोप था कि मदन मरांडी ने उसके कनपटी के पास गोली चलाई और शोर मचाने पर फरार हो गया। इस घटना के पीछे दो वर्ष पूर्व एक शादी समारोह में हुए विवाद को कारण बताया गया था।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी के पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। कथित विवाद भी काफी पुराना और सामान्य प्रकृति का था, जिसे हत्या के प्रयास का ठोस मकसद नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान और साक्ष्य आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाए। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को अस्थिर बताते हुए आरोपी मदन मरांडी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

