Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के दो जिला सहकारिता पदाधिकारियों को नियमित प्रोन्नति देने के मामले में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जगमनी टोप्पो और उमेश कुमार सिन्हा के मामले को विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) के समक्ष रखकर कानून और नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक निबंधक/जिला सहकारिता पदाधिकारी के रूप में हुई थी और वर्ष 2010 में उनकी सेवा संपुष्ट हो गई थी। इसके बावजूद 17 वर्षों से उन्हें नियमित प्रोन्नति नहीं दी गई, जबकि विभाग में उप निबंधक और संयुक्त निबंधक के कई पद रिक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनसे जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों पर पदस्थापित कर दिया गया, लेकिन उनके मामले पर विचार नहीं किया गया।
राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ताओं को एमएसीपी का लाभ दिया जा चुका है, इसलिए याचिका में कोई दम नहीं है। हालांकि अदालत ने पाया कि बाद की अधिसूचना के जरिए याचिकाकर्ताओं का ग्रेड पे फिर से 5400 रुपये कर दिया गया था और एमएसीपी का लाभ नियमित प्रोन्नति का विकल्प नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर कनिष्ठों को प्रोन्नति देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत है। कोर्ट ने सरकार को 12 सप्ताह के भीतर डीपीसी की बैठक कर याचिकाकर्ताओं के प्रोन्नति के दावे पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यदि वे योग्य पाए जाते हैं तो उन्हें उनके कनिष्ठों के प्रोन्नत होने की तिथि से काल्पनिक (नोशनल) प्रोन्नति और अन्य सेवा लाभ भी दिए जाएंगे।

