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HC News: विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी नेटवर्क में भेजने के आरोपी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, क्रिमिनल अपील खारिज

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By CourtNews Desk On 06 Aug, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं को थाईलैंड और म्यांमार भेजने तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और हनी ट्रैप गिरोह से जोड़ने के आरोपी जमशेदपुर के आजाद नगर निवासी मोहम्मद सरताज आलम की क्रिमिनल अपील(जमानत) खारिज कर दी। अदालत ने साइबर क्राइम(रांची) थाना कांड संख्या 158/2025 में 28 मार्च 2026 को विशेष साइबर अपराध अदालत द्वारा जमानत अस्वीकार किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अभियोजन के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर एक युवक नौकरी की तलाश कर रहा था। इसी दौरान टेलीग्राम के माध्यम से उसकी पहचान एक व्यक्ति से हुई, जिसने बैंकॉक में 70 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का प्रलोभन दिया। आरोपी पक्ष की ओर से उसे हवाई टिकट, होटल बुकिंग और अन्य यात्रा संबंधी दस्तावेज भेजे गए। 10 अक्टूबर 2025 को वह थाईलैंड पहुंचा, जहां से उसे सीमा पार कर म्यांमार ले जाया गया। वहां उसे ऐसे गिरोह के बीच रखा गया, जो साइबर ठगी और हनी ट्रैप जैसे अपराधों में संलिप्त था। बाद में म्यांमार सेना की कार्रवाई के दौरान वह हिरासत में आया और भारतीय दूतावास के सहयोग से भारतीय वायुसेना के विमान से भारत लौट सका। इसके बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा होने पर साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।

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अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पीड़ित के प्रारंभिक बयान में उसका नाम नहीं था। उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उसे केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, वह 18 फरवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में है तथा मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं। केस डायरी में दर्ज पीड़ित अब्दुल्ला कौसर के बयान में आरोपी का स्पष्ट उल्लेख है। उसने बताया कि मोहम्मद सरताज आलम ने ही नौकरी का लालच देकर उसे इस अवैध नेटवर्क से जोड़ा। जांच के दौरान आरोपी का स्वीकारोक्ति बयान भी दर्ज किया गया तथा उसके कब्जे से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। इसके अलावा सह-आरोपी दाऊद के साथ धन के लेन-देन के साक्ष्य भी केस डायरी में दर्ज हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी ने स्वयं को पंजीकृत भर्ती एजेंट बताया, लेकिन जांच में इस दावे की पुष्टि नहीं हुई। खंडपीठ ने कहा कि केस डायरी से प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट होता है कि आरोपी नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को फंसाकर उन्हें साइबर ठगी और हनी ट्रैप नेटवर्क में शामिल कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। आरोपों की गंभीरता, जांच में मिले साक्ष्य और आरोपी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इन परिस्थितियों में निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने क्रिमिनल अपील खारिज कर दी।

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