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HC News: एनएलयू वित्तीय संकट: हाईकोर्ट ने पूछा- क्या कॉर्पोरेट कंपनियां सीएसआर (CSR) फंड से दे सकती हैं सालाना ग्रांट? सभी पक्षों को नोटिस

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 11 Jun, 2026
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Ranchi News: कांके (रांची) स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) के सालाना वित्तीय अनुदान (एनुअल ग्रांट) की मांग को लेकर बार एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में झारखंड के मेधावी छात्रों को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है, इसलिए राज्य के हित में इस संस्थान को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना बेहद जरूरी है।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सुझाव आया कि एनएलयू की वित्तीय जरूरतों और आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे सीसीएल (CCL) और सेल (SAIL) से उनके ‘कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (CSR) मद के तहत आर्थिक सहयोग लिया जा सकता है। इस पर अदालत ने दोनों कंपनियों के वकीलों को इस संबंध में अपना स्पष्ट रुख रखने को कहा है।

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वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय को सालाना ग्रांट देने से हाथ खींच लिए हैं। सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी एक स्वपोषित (Self-Financed) संस्थान है। स्थापना के वक्त सरकार ने भूमि और पर्याप्त प्रारंभिक फंड दे दिया था, और अब हर साल अनुदान देने का कोई वैधानिक (कानूनी) प्रावधान नहीं है। इसके विपरीत, विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि पर्याप्त संसाधन न होने से संस्थान ठप होने की कगार पर है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 9 जुलाई को कॉन्फ्रेंस हॉल में मुकर्रर की है, जिसमें कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों और आवश्यकता पड़ने पर राज्य के संबंधित सचिवों को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है

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