* मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के कथित टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़ा है मामला
* कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई पूरी करने के बाद सुरक्षित रख लिया था फैसला, प्रार्थी की रोक लगाने की दलील नामंजूर
Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने कथित टेंडर कमीशन घोटाले के आरोपी और मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के करीबी सहयोगी नीरज मित्तल को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पुलिस थाने में दर्ज मूल आपराधिक मामले (Predicate Offense) में अब तक आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल नहीं होने के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने पीएमएलए (PMLA) के तहत दर्ज ईसीआईआर (ECIR) की सुनवाई स्थगित करने की मांग करने वाली नीरज मित्तल की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति की अदालत ने पूर्व में इस मामले पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
क्या थी प्रार्थी की दलील?
याचिकाकर्ता नीरज मित्तल की ओर से अदालत में तर्क दिया गया था कि जिस मूल प्राथमिकी (FIR) के आधार पर ईडी ने उनके खिलाफ ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है, उस मूल मामले में पुलिस ने अभी तक कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। प्रार्थी का कहना था कि एक तरफ जहां मूल केस अभी भी लंबित है, वहीं दूसरी तरफ ईडी के मामले में ट्रायल काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जब तक मूल मामले की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक ईसीआईआर से संबंधित कार्यवाही और ट्रायल पर रोक लगाई जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया।
वीरेंद्र राम के ठिकानों पर छापेमारी के बाद हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि नीरज मित्तल को ग्रामीण विकास विभाग के निलंबित मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता है। राज्य के बहुचर्चित कथित टेंडर कमीशन घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी ने 21 फरवरी 2023 को एक बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान वीरेंद्र राम के रांची, जमशेदपुर, पटना और दिल्ली स्थित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। इस देशव्यापी कार्रवाई के बाद ईडी ने वीरेंद्र राम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जांच की आंच नीरज मित्तल तक पहुंची थी। हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब नीरज मित्तल के खिलाफ ईडी की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही बिना किसी बाधा के जारी रहेगी।