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High Court News: बीसीए डिग्री विज्ञान संकाय की, हाईकोर्ट ने जेएसएससी की आपत्ति की खारिज

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By CourtNews Desk On 08 Aug, 2026
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शारीरिक शिक्षा शिक्षक नियुक्ति मामले में राज्य की दोनों अपीलें खारिज, हाईकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने शारीरिक शिक्षा के प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक की नियुक्ति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) की डिग्री विज्ञान संकाय के अंतर्गत आती है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल दोनों एलपीए को खारिज कर दिया। फैसला छह अगस्त 2026 को सुनाया गया। मामला मुक़ेश रंजन और अभिजीत कुमार सिन्हा की नियुक्ति से जुड़ा था। दोनों के पास बीसीए के साथ शारीरिक शिक्षा की डिग्री भी है। नियुक्ति विज्ञापन में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक, शारीरिक शिक्षा के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कला, वाणिज्य या विज्ञान में कम से कम 45 प्रतिशत अंक के साथ स्नातक की योग्यता निर्धारित थी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत थी। जेएसएससी ने दोनों की उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज की थी कि बीसीए को विज्ञान संकाय की स्नातक डिग्री नहीं माना जा सकता। राज्य का तर्क था कि दोनों ने वर्ष 2014 से पहले बीसीए किया था और उस समय यूजीसी की अधिसूचना में बीसीए को किसी विशेष संकाय के तहत नहीं रखा गया था। दूसरी ओर, अभ्यर्थियों ने 2014 की यूजीसी अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि इसमें बीसीए को विज्ञान संकाय में रखा गया है।

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खंडपीठ ने यूजीसी की 2009 और 2014 की अधिसूचनाओं का परीक्षण करते हुए कहा कि 2014 की अधिसूचना में बीसीए को विज्ञान संकाय में रखना केवल स्पष्टीकरण था। बीसीए की डिग्री का नाम या स्वरूप नहीं बदला गया था। अदालत ने माना कि अधिसूचना का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि बीसीए किस संकाय के अंतर्गत आता है। अदालत ने यह भी पाया कि दोनों अभ्यर्थियों ने विज्ञान संकाय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की थी। मुक़ेश रंजन ने एक अक्टूबर 2024 और अभिजीत कुमार सिन्हा ने चार अप्रैल 2025 को सेवा में योगदान दिया था और दोनों तब से कार्यरत हैं। खंडपीठ ने कहा कि यदि अभ्यर्थी विज्ञापन में निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी करता है और उसके अंक अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक हैं, तो केवल बीसीए डिग्री के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती। अदालत ने एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए राज्य की दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

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