* अदालत ने DSE के आदेश को किया रद्द; 30 दिनों के भीतर नियुक्ति स्वीकृति और 17 मई 2023 से वेतन भुगतान का निर्देश
* अल्पसंख्यक स्कूलों में नियुक्ति के प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लें सक्षम प्राधिकारी: हाईकोर्ट
Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने राजधानी के डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं की नियुक्ति को पूरी तरह वैध ठहराते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) द्वारा इन शिक्षिकाओं की नियुक्ति को अस्वीकृत करने वाले आदेश को सिरे से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति की औपचारिक स्वीकृति जारी करे और उनके योगदान (जॉइनिंग) की तिथि से बकाया वेतन का भुगतान करे।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियम बदलना गलत: जस्टिस दीपक रोशन
यह आदेश न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाकर्ता सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट रूप से माना कि डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल एक भाषाई अल्पसंख्यक (Linguistic Minority) विद्यालय है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक बार जब चयन प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उसके बाद नियमों को बदला नहीं जा सकता (Rules of the game cannot be changed after the game has started)। इस आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को गलत ठहराना पूरी तरह अनुचित है।
DSE के दोनों तर्कों को हाईकोर्ट ने किया खारिज
गौरतलब है कि इन दोनों शिक्षिकाओं का चयन वर्ष 2023 में सहायक शिक्षिका (Assistant Teacher) के रूप में हुआ था। हालांकि, रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) ने यह कहते हुए उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था कि यह विद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है और दोनों अभ्यर्थी निर्धारित आयु सीमा से अधिक (Overage) हैं।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और पूर्व में आ चुके न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए DSE के इन दोनों आधारों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि:
- विद्यालय को अल्पसंख्यक संस्था की स्थिति पहले से ही कानूनी रूप से मान्य रही है।
- जहां तक आयु सीमा का सवाल है, राज्य सरकार के वर्ष 2022 के नियमों के अनुसार, चयन प्रक्रिया में लंबे अंतराल को देखते हुए अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट का लाभ मिलना बिल्कुल न्यायसंगत है।
देरी करना प्रशासनिक मनमानी, भविष्य के लिए गाइडलाइन जारी
हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नियुक्ति स्वीकृति के प्रस्ताव पर इतने लंबे समय तक निर्णय न लेना सीधे तौर पर ‘प्रशासनिक मनमानी’ (Administrative Arbitrariness) का उदाहरण है। भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए अदालत ने एक बड़ी गाइडलाइन जारी की है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि अब से अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति की स्वीकृति से जुड़े जितने भी प्रस्ताव आएंगे, उन पर सक्षम प्राधिकारी को 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से निर्णय लेना होगा।
17 मई 2023 से मिलेगा सभी सेवा लाभ
अदालत ने संबंधित विद्यालय प्रबंधन को दोनों शिक्षिकाओं को तत्काल कार्यभार ग्रहण कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, रांची DSE को 30 दिनों के भीतर नियुक्ति की औपचारिक स्वीकृति जारी करने तथा 17 मई 2023 से उनकी सेवा को प्रभावी मानते हुए सभी परिणामी सेवा लाभ (Consequential Benefits) और वेतन जारी करने का कड़ा निर्देश दिया है।

