रात्रि प्रहरी की हत्या के मामले को कोर्ट ने लिया गंभीरता से; कहा- ढिलाई बर्दाश्त नहीं, 23 जून को होगी अगली सुनवाई
पारदर्शी प्रबंधन के लिए बड़े मंदिरों के बायलॉज (उपविधियों) का अध्ययन कर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश
Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने राजधानी रांची के जगन्नाथपुर स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक जगन्नाथपुर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने का एक बड़ा और कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को स्पष्ट आदेश दिया है कि मंदिर परिसर में चौबीसों घंटे (24 घंटे) पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने मंदिर के सुचारु और पारदर्शी संचालन के लिए देश के अन्य बड़े मंदिरों के बायलॉज (उपविधियों) का अध्ययन कर विस्तृत शपथपत्र पेश करने का निर्देश भी दिया है। इस जनहित से जुड़े मामले की अगली सुनवाई अब 23 जून को निर्धारित की गई है।
रात्रि प्रहरी की हत्या पर कोर्ट सख्त, कहा- धार्मिक महत्व के अनुरूप हो सुरक्षा
यह निर्देश जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति के पूर्व सचिव चंद्रकांत रायपत द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें मंदिर के सही तरीके से संचालन और व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाल ही में मंदिर के रात्रि प्रहरी (नाइट गार्ड) की हुई दर्दनाक हत्या का मामला भी प्रमुखता से उठा। हाईकोर्ट ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही या ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से एसएसपी को तत्काल प्रभाव से मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने और दिन-रात कड़ा पहरा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बड़े मंदिरों की तर्ज पर बनेगा जगन्नाथपुर मंदिर का नया बायलॉज
हाईकोर्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधार के संकेत देते हुए निर्देश दिया कि राज्य व देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की संचालन व्यवस्था और उनके बायलॉज का गहन अध्ययन किया जाए और उसकी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
अदालत ने कहा कि जिस प्रकार देश के अन्य बड़े और विख्यात मंदिरों का संचालन बेहद सुव्यवस्थित और पेशेवर समितियों के माध्यम से किया जाता है, उसी तर्ज पर जगन्नाथपुर मंदिर के लिए भी एक उपयुक्त और आधुनिक बायलॉज तैयार किया जाना चाहिए। इससे मंदिर का प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी, सुचारु और विवादों से परे हो सकेगा।
संस्थापक सदस्यों की भागीदारी भी होगी सुनिश्चित
अदालत ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को इस संबंध में अपने-अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही माननीय न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नया बायलॉज तैयार करने की इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर के मूल संस्थापक सदस्यों (रॉयल फैमिली/फाउंडर मेंबर्स) की भागीदारी को भी पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए, ताकि परंपराओं का भी सम्मान बना रहे।

