Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के एक विवादित परिसर से जबरन बेदखली के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की एकल पीठ ने मंगलवार को आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता वर्तमान में उस परिसर में रह रहे हैं, तो अगली सुनवाई तक उन्हें वहां से नहीं हटाया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला फातिमा खातून एवं अन्य की ओर से दायर एक रिट याचिका से जुड़ा है।
- याचिकाकर्ता का पक्ष: याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ए.के. दास ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल लंबे समय से उक्त विवादित मकान में निवास कर रहे हैं। उन्हें वहां से जबरन बेदखल करने की गंभीर कोशिशें की जा रही हैं, जिससे उन पर हमेशा बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने अदालत से सुरक्षा और हस्तक्षेप की गुहार लगाई।
- प्रतिवादी और राज्य सरकार का पक्ष: दूसरी तरफ, राज्य सरकार और प्रतिवादियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता कौशिक सारखेल और अधिवक्ता पी.ए.एस. पति ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में एक रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया कि विवादित परिसर में याचिकाकर्ता नहीं, बल्कि साहेब अख्तर नामक कोई अन्य व्यक्ति रह रहा है। इस आधार पर उन्होंने याचिकाकर्ताओं के दावे को पूरी तरह से खारिज करने की मांग की।
अदालत का रुख और अंतरिम आदेश
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीच का रास्ता निकाला। चूंकि परिसर में वास्तविक रूप से कौन रह रहा है, इसे लेकर दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास है, इसलिए अदालत ने ‘यथास्थिति’ को ध्यान में रखकर आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट का आदेश:
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता वास्तव में उस विवादित परिसर में रह रहे हैं, तो उन्हें मामले की अगली सुनवाई तक वहां से बेदखल न किया जाए।
अदालत ने मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तिथि तय की है। आगामी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को यह साबित करने के लिए पुख्ता साक्ष्य (Evidence) पेश करने होंगे कि विवादित मकान पर वास्तविक कब्जा किसका है।

