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HC News: जाति प्रमाण पत्र में पति का नाम होना उम्मीदवार की गलती नहीं, हाईकोर्ट ने नौकरी देने का दिया आदेश

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By CourtNews Desk On 17 Aug, 2026
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जेपीएससी ने एससी वर्ग में उम्मीदवारी रद्द की थी, मुख्य परीक्षा में कटऑफ से सात अंक अधिक मिले थे चंचला कुमारी को

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने में अधिकारी की गलती का खामियाजा किसी योग्य उम्मीदवार को नहीं भुगतना चाहिए। अदालत ने जेपीएससी को चंचला कुमारी की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2021 में एससी वर्ग के तहत उम्मीदवारी पर पुनर्विचार कर राज्य सरकार को नियुक्ति की अनुशंसा करने का निर्देश दिया है। जेपीएससी को आठ सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद राज्य सरकार को अनुशंसा मिलने के चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। चंचला कुमारी ने जेपीएससी की 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2021 के विज्ञापन संख्या 01/2021 के तहत एससी वर्ग में आवेदन किया था। उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाएं सफलतापूर्वक पास कीं। मुख्य परीक्षा में उन्हें 590 अंक मिले थे, जबकि एससी वर्ग की कटऑफ 583 अंक थी। इसके बावजूद 31 मई 2022 को जारी अंतिम परिणाम में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।

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जेपीएससी ने उनकी उम्मीदवारी रद्द करने का कारण बताया कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा में एससी वर्ग का लाभ ऐसे जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लिया था, जिसमें पिता के बजाय पति का नाम दर्ज था। आयोग के अनुसार निर्धारित तिथि तक पिता के नाम से जारी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था। चंचला की ओर से अदालत में बताया गया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र के लिए 4 जनवरी 2019 को आवेदन किया था। कोडरमा के एसडीओ ने 27 मार्च 2019 को प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन उसमें पिता की जगह पति का नाम दर्ज कर दिया। इसी बीच राज्य सरकार ने 25 फरवरी 2019 को अधिकारियों को पिता के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया था।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान 9 मई 2022 को चंचला ने पिता के नाम से जारी नया जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। दोनों प्रमाण पत्रों में उनका पता और जाति समान थी। उनका तर्क था कि विवाह के बाद उनकी जाति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और प्रमाण पत्र में नाम की गलती पूरी तरह अधिकारी की थी।

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न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने माना कि प्रमाण पत्र में पति का नाम दर्ज होना अधिकारी की गलती थी। अदालत ने यह भी कहा कि 25 फरवरी 2019 का सरकारी पत्र राजपत्र में प्रकाशित नहीं था। साथ ही प्रमाण पत्र के निर्धारित प्रारूप में पति का नाम दर्ज करने का स्थान भी था। इसलिए केवल इस तकनीकी आधार पर उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द करना उचित नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब उम्मीदवार की जाति और निवास संबंधी स्थिति पर कोई विवाद नहीं है और वह परीक्षा में निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त कर चुकी है, तो अधिकारी की गलती के कारण उसे नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।

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