Ranchi News: फैमिली कोर्ट से तलाक मिलने के बाद अगर पति दूसरी शादी कर लेता है, तो दोनों के फिर से एक साथ रहने का रास्ता लगभग बंद हो जाता है। ऐसे मामलों में अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ पत्नी के गुजारा भत्ते (Permanent Alimony) का रह जाता है। झारखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच ने लातेहार के एक दंपत्ति से जुड़े विवाद में यह अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही शादी टूट चुकी हो, लेकिन कानूनी रूप से पति अपनी पूर्व पत्नी को बेसहारा नहीं छोड़ सकता। उसे पत्नी के मान-सम्मान और जीवन-यापन के लिए उसकी हैसियत के हिसाब से वाजिब गुजारा भत्ता देना ही होगा। लातेहार के एक दंपत्ति के विवाह विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद एवं जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी को ₹30 लाख का स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) देने का आदेश दिया है। अदालत ने संतुलन बनाते हुए पति को ₹30 लाख की एकमुश्त राशि 12 महीनों के भीतर 4 समान किस्तों में चुकाने का निर्देश दिया है। पहली किस्त अगले 2 महीनों के भीतर देनी होगी। हाईकोर्ट ने साफ किया कि भरण-पोषण दया नहीं बल्कि पत्नी का कानूनी अधिकार है, ताकि वह भविष्य में आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सके। अदालत ने माना कि भारतीय महिलाओं की औसत आयु 70 वर्ष के आधार पर पत्नी को अगले 42 वर्षों तक जीवन-यापन करना है। पूर्व में तय ₹10,000 मासिक भरण-पोषण के हिसाब से 42 वर्षों में कुल राशि लगभग ₹50 लाख बनती है। लेकिन कोर्ट ने 30 लाख रुपए एकमुश्त देने का आदेश दिया
क्या है पूरा मामला?
दानापुर (बिहार) स्थित SSB की 40वीं बटालियन में सिपाही और लातेहार की महिला का विवाह 2017 में हुआ था। पति द्वारा दायर याचिका पर फैमिली कोर्ट, लातेहार ने 2022 में तलाक की मंजूरी दे दी थी, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। अपील लंबित रहने के दौरान ही जनवरी 2025 में जवान पति ने दूसरी शादी कर ली। पुनर्मिलन की संभावना समाप्त होने पर मामला स्थायी गुजारा भत्ता के निर्धारण पर आ गया। पति का सकल वेतन ₹66,097 प्रति माह है, जबकि 28 वर्षीया पत्नी बेरोजगार है और सड़क किनारे सब्जी की दुकान चलाने में मां की मदद करती है।

