Ranchi HC News: झारखंड हाईकोर्ट ने अरगोड़ा चौक के पास संचालित लेक गार्डन बैंक्वेट हॉल को लेकर रांची नगर निगम को अहम निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकलपीठ ने 5 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में कहा कि जब तक इस मामले में अंतिम आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक रांची नगर निगम भवन को सील नहीं कर सकता।
निगम को सुनवाई करने सीलका निर्देश
कोर्ट ने रांची नगर निगम के नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस मामले में औपचारिक प्रक्रिया शुरू करें, याचिकाकर्ताओं को नया नोटिस जारी करें और उनका जवाब मिलने के बाद कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश से पहले याचिकाकर्ताओं या उनके प्रतिनिधियों को सुनवाई का मौका दिया जाए।
निगम के नोटिस को दी चुनौती
मामला याचिकाकर्ता श्रेया प्रसाद और मुकेश कुमार की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है। याचिका में सहायक नगर योजनाकार, रांची नगर निगम द्वारा जारी मेमो नं. 2030 दिनांक 16.09.2026 को चुनौती दी गई थी।
इस नोटिस में कहा गया था कि अरगोड़ा चौक के पास स्थित भवन का व्यावसायिक/गैर-आवासीय उपयोग किया जा रहा है, जो अवैध है। नोटिस में सात दिनों के भीतर व्यावसायिक उपयोग बंद करने का निर्देश दिया गया था, वरना भवन को सील करने और झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 तथा झारखंड बिल्डिंग बायलॉज, 2016 के तहत कार्रवाई की बात कही गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे अरगोड़ा चौक के पास लेक गार्डन बैंक्वेट हॉल चलाते हैं। भूमि याचिकाकर्ता नंबर 2 की है। याचिकाकर्ता नंबर 1 के नाम 19.11.2022 को ट्रेड लाइसेंस जारी किया गया था और भवन का वैध होल्डिंग नंबर भी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे कमर्शियल दर पर होल्डिंग टैक्स भी जमा कर रहे हैं। उन्होंने बायलॉज 2016 के क्लॉज 29.9, टेबल 4, एंट्री 22 का हवाला देते हुए कहा कि आवासीय क्षेत्र में कम्युनिटी हॉल और वेलफेयर सेंटर चलाया जा सकता है। यह भी तर्क दिया गया कि बिना उचित प्रक्रिया और सुनवाई का मौका दिए किसी भवन को सील नहीं किया जा सकता।
निगम की नोटिस सही
दूसरी ओर, नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहीं डॉ. वंदना सिंह ने कहा कि आवासीय क्षेत्र में बैंक्वेट हॉल चलाया जाना अधिनियम, 2011 और बायलॉज, 2016 के तहत अनुमत नहीं है, इसी कारण नोटिस जारी किया गया था।
कोर्ट ने पाया कि प्रभावित नोटिस के बाद रांची नगर निगम ने अभी कोई आगे की कार्रवाई नहीं की है। इसलिए कोर्ट ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस मामले में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएं, नया नोटिस जारी करें।
याचिकाकर्ताओं का जवाब तथा सुनवाई सुनिश्चित करने के बाद कानून के अनुसार अंतिम आदेश पारित करें। अंतिम आदेश तक भवन को सील न करने का निर्देश देते हुए हाईकोर्ट ने रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

