नियुक्तियां जांच के परिणाम पर निर्भर रहेंगी
Ranchi News: माध्यमिक आचार्य पुनर्परीक्षा मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कथित परीक्षा अनियमितताओं की आपराधिक जांच का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को CID में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और मामले की स्वतंत्र जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि माध्यमिक आचार्य के पदों पर होने वाली नियुक्तियां CID जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। अर्पणा कुमारी एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता रूपेश सिंह और चंचल जैन ने अदालत के समक्ष परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मामला उठाया था। याचिका में JSSC के पुनर्परीक्षा कराने के निर्णय को चुनौती देते हुए स्वतंत्र जांच और प्रथम परीक्षा के आधार पर निर्दोष अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग की गई थी।
अदालत ने CID को BNSS के प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जांच में निर्दोष पाए जाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रथम परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाने को कहा गया है। वहीं, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
2819 अभ्यर्थियों को दो सप्ताह में मिलेगा प्रथम परीक्षा का उत्तर
हाईकोर्ट ने 2819 अभ्यर्थियों को प्रथम परीक्षा से संबंधित उत्तर/उत्तर-पत्र दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही JSSC को प्रथम परीक्षा और पुनर्परीक्षा से जुड़े सभी आंकड़े और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है। JSSC, परीक्षा एजेंसी और संबंधित परीक्षा केंद्रों को CID जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
‘कोई संस्था अपने ही मामले में खुद न्यायाधीश नहीं बन सकती’
सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित हैकिंग और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर JSSC से कई सवाल पूछे थे। अदालत ने पूछा था कि कथित हैकिंग की स्वतंत्र एजेंसी से जांच क्यों नहीं कराई गई और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की रिपोर्ट को ही आधार क्यों बनाया गया। जिन केंद्रों पर गड़बड़ी की बात सामने आई, वहां क्या कार्रवाई हुई और क्या इसका असर कुछ कंप्यूटरों तक था या पूरे परीक्षा केंद्र पर पड़ा था।
अदालत ने माना कि ऐसे आरोपों की जांच उसी परीक्षा एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर नहीं छोड़ी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई संस्था अपने ही मामले में स्वयं न्यायाधीश नहीं बन सकती। इसलिए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष आपराधिक जांच जरूरी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों में राहत की उम्मीद जगी है। याचिकाकर्ताओं ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि स्वतंत्र जांच से कथित अनियमितताओं की वास्तविकता सामने आएगी और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हो सकेगी।