Jharkhand

HC News: 28 साल पुराने सड़क हादसा मामले में हाईकोर्ट ने मुआवजा 2 लाख से बढ़ाकर 7.60 लाख किया

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By CourtNews Desk On 20 Aug, 2026
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बीमा कंपनी की दलील खारिज, कहा- पॉलिसी फर्जी थी तो कंपनी को ट्रिब्यूनल में सबूत देना चाहिए था

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 28 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में मृतक के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा राशि 2 लाख से बढ़ाकर 7.60 लाख रुपये कर दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक की अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए मुआवजा राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। ब्याज दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक देना होगा। कोर्ट ने कहा कि उचित मुआवजा देने के लिए अपीलीय अदालत बिना अलग अपील के भी राशि बढ़ा सकती है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को छह सप्ताह में राशि अदालत में जमा करने का निर्देश दिया गया है। पहले भुगतान की गई रकम समायोजित होगी।

बीमा पॉलिसी फर्जी होने का दावा खारिज

मामला हजारीबाग के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के 1 जुलाई 2013 के फैसले से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने जुबैदा खातून के दावे पर 2 लाख रुपये मुआवजा दिया था। इसके खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील की। कंपनी का कहना था कि हादसे में शामिल BR-13-P-9925 वाहन का उसके यहां बीमा नहीं था और ट्रिब्यूनल में पेश की गई बीमा पॉलिसी की फोटो कॉपी फर्जी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के सामने केवल लिखित बयान में पॉलिसी से इनकार किया, लेकिन अपने रिकॉर्ड पेश कर यह साबित नहीं किया कि पॉलिसी उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। फर्जीवाड़े के आरोप को साबित करने के लिए भी कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं दिया गया। इसलिए केवल अपील में फर्जी पॉलिसी का दावा करके बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी माना।

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धारा 163-ए के बजाय धारा 166 के तहत होना था आकलन

अदालत ने मुआवजे की गणना में ट्रिब्यूनल की गलती भी पकड़ी। ट्रिब्यूनल ने मामले को धारा 163-ए के तहत मानकर सालाना 15 हजार रुपये की काल्पनिक आय के आधार पर मुआवजा तय किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि दावा याचिका धारा 140 और 166 के तहत दाखिल हुई थी। मृतक की उम्र 36 वर्ष, पेशा राजमिस्त्री और मासिक आय 3 हजार रुपये बताई गई थी। इस आय को गवाही में चुनौती नहीं दी गई, इसलिए इसे स्वीकार किया गया।

पत्नी और तीन बच्चों को भी consortium

हाईकोर्ट ने 3 हजार रुपये मासिक आय पर 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ीं और 36 वर्ष की उम्र के लिए 15 का गुणक लगाया। पत्नी और तीन बच्चों के होने के कारण एक-चौथाई व्यक्तिगत खर्च घटाया गया। निर्भरता का नुकसान 5.67 लाख रुपये आया। पत्नी और तीन बच्चों समेत चार आश्रितों को 40-40 हजार रुपये consortium, 15 हजार अंतिम संस्कार और 15 हजार रुपये संपत्ति के नुकसान के लिए दिए गए। कुल राशि 7.57 लाख बनी, जिसे अदालत ने 7.60 लाख रुपये कर दिया।

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