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HC News: चाय-बिस्कुट ले जाने पर चपरासी को हटाने का मामला: झारखंड हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को किया निरस्त, 1 जुलाई तक बहाल करने का निर्देश

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 27 Jun, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए), बोकारो में संविदा पर कार्यरत चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने प्रशासन के इस कृत्य को “असंवेदनशीलता से भरा अन्याय” करार देते हुए पीड़ित को तत्काल सेवा में बहाल करने और 50 प्रतिशत पिछला वेतन देने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बोकारो के रहने वाले रंजीत कुमार हिमांशु को 31 दिसंबर 2005 को डीआरडीए, बोकारो में संविदा के आधार पर चपरासी के पद पर नियुक्त किया गया था। करीब 17 वर्षों तक बेदाग सेवा देने के बाद, 16 मार्च 2022 को बोकारो के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) द्वारा उन्हें एक अत्यंत अस्पष्ट कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में सिर्फ इतना कहा गया था कि कार्यालय से कुछ सामग्री गायब हुई है, जिसे रंजीत अपने घर ले गए थे। बाद में स्पष्ट हुआ कि वह सामग्री और कुछ नहीं, बल्कि मात्र चायपत्ती और बिस्कुट थी।

इस मामूली बात को लेकर प्रशासन ने 2 मई 2022 को बिना किसी ठोस कारण के रंजीत की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज होने के बाद पीड़ित ने खंडपीठ में अपील दायर की थी।

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हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां: “आत्मा को झकझोर देने वाला फैसला”

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार रहीं:

  • अस्पष्ट नोटिस का कोई आधार नहीं: कोर्ट ने कहा कि अस्पष्ट कारण बताओ नोटिस जारी करना बिना नोटिस देने के समान है। प्रशासन ने रंजीत के 17 साल के बेदाग रिकॉर्ड और पूर्व अधिकारियों द्वारा दिए गए उत्कृष्ट कार्य के प्रमाणपत्रों को नजरअंदाज कर दिया।
  • सजा और गलती में कोई सामंजस्य नहीं: कोर्ट ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि चपरासी घर पर चाय-बिस्कुट ले गया था, तो भी इसके लिए सीधे नौकरी से निकाल देना पूरी तरह से असंगत और आत्मा को झकझोर देने वाला है।
  • मानवीय पक्ष की अनदेखी: रंजीत की मामूली तनख्वाह पर उनकी पत्नी, तीन बेटियों और एक छोटी बहन सहित छह लोगों का परिवार निर्भर है। कोर्ट ने दुख जताया कि बर्खास्तगी के समय इस मानवीय पक्ष पर न्यूनतम विचार भी नहीं किया गया।

“हम केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं कि पिछले चार साल से नौकरी से बाहर चल रहे एक गरीब चपरासी और उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी, सिर्फ इसलिए कि उनका पिता बच्चों को खिलाने के लिए कार्यालय से कुछ चाय और बिस्कुट घर ले आया था।” — झारखंड हाई कोर्ट

अदालत का कड़ा निर्देश और समय-सीमा (Timeline)

हाई कोर्ट ने इस मामले में उपायुक्त (DC) बोकारो और उप विकास आयुक्त (DDC) बोकारो को व्यक्तिगत रूप से आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है:

  • सेवा में बहाली: रंजीत कुमार हिमांशु को 1 जुलाई 2026 तक हर हाल में सेवा में वापस लिया जाए।
  • बकाया वेतन का भुगतान: पिछले चार साल का 50 प्रतिशत बकाया वेतन 31 जुलाई 2026 तक भुगतान किया जाए। (कोर्ट ने कहा कि बाकी 50% वेतन कटना ही उनकी कथित गलती के लिए पर्याप्त सजा है)।
  • अदालत में शपथ पत्र (Affidavit): डीसी बोकारो को बहाली के संबंध में 10 जुलाई 2026 तक और वेतन भुगतान के संबंध में 10 अगस्त 2026 तक अदालत में अनुपालन का शपथ पत्र दायर करना होगा।
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