Ranchi News: सीआईडी के बहुचर्चित 95.65 एकड़ कथित वन भूमि घोटाला मामले में सीआईडी के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी शैलेश कुमार सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामला बड़े भूमि घोटाले से जुड़ा है, जांच अभी जारी है और उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण दिखाई देती है। इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। शैलेश कुमार सिंह सीआईडी कांड संख्या में 7 जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के साथ भारतीय वन अधिनियम की धाराओं में जांच जारी है।
क्या है मामला
सीआईडी के अनुसार बोकारो के चास थाना क्षेत्र के मौजा टेटुलिया की प्लॉट संख्या 426, 450 सहित 95.65 एकड़ भूमि संरक्षित वन भूमि है। आरोप है कि वर्ष 2012 के बाद फर्जी 1933 के नीलामी प्रमाणपत्र और अन्य कागजात तैयार कर इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन ने जमीन पर दावा किया, जमाबंदी कराई और बाद में पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए यह जमीन उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी गई। कंपनी का गठन रजिस्ट्री से कुछ दिन पहले ही किया गया था। सीआईडी का आरोप है कि शैलेश कुमार सिंह पूरे षड्यंत्र का प्रमुख सूत्रधार है तथा उसके बेटे और रिश्तेदार कंपनी से जुड़े हैं।
बचाव पक्ष की दलील
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 में तथा एलपीए में 2020 में इस भूमि को वन भूमि नहीं माना था और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उस आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। इसी आधार पर पहले दर्ज एक आपराधिक मामला भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसलिए वर्तमान प्राथमिकी दुर्भावनापूर्ण है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।
अदालत ने क्यों खारिज की जमानत
अदालत ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से केवल दीवानी विवाद का मामला नहीं बनता। रिकॉर्ड में सह-आरोपियों के बयान, पावर ऑफ अटॉर्नी, कंपनी के गठन और जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेज प्रथम दृष्टया व्यापक साजिश की ओर संकेत करते हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि सरकारी अभिलेखों की विस्तृत जांच अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिभा मंचंदा बनाम हरियाणा राज्य फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि भूमि घोटाले गंभीर प्रकृति के अपराध हैं, इसलिए जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।

