क्रिमिनल रिवीजन खारिज, अनुज मिश्रा के खिलाफ बीएनएस की धारा 85 में संज्ञान बरकरार; अन्य पर आरोप सामान्य और अस्पष्ट पाए गए
Ranchi News: पत्नी से प्रताड़ना के मामले में न्यायिक आयुक्त की अदालत ने स्पष्ट किया है कि ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ सामान्य और अस्पष्ट आरोप के आधार पर आपराधिक संज्ञान नहीं लिया जा सकता। अदालत ने पति अनुज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 85 के तहत लिए गए संज्ञान को बरकरार रखते हुए पत्नी अर्चना मिश्रा की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के 12 नवंबर 2025 के आदेश में किसी तरह की अवैधता या त्रुटि नहीं पायी।
मामला क्रिमिनल रिवीजन संख्या 154/2026 और शिकायत वाद संख्या 11250/25 से जुड़ा है। अर्चना मिश्रा ने पति अनुज मिश्रा के अलावा ससुर राजेंद्र मिश्रा, सास सावित्री मिश्रा और देवर आशु मिश्रा के खिलाफ प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी थी। मामले में सुनवाई के बाद JMFC-IV की अदालत ने केवल पति के खिलाफ बीएनएस की धारा 85 के तहत संज्ञान लिया था। अन्य ससुराल वालों के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर संज्ञान नहीं लिया गया।
अन्य ससुराल वालों पर आरोप सामान्य
निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अर्चना मिश्रा ने रिवीजन याचिका दायर कर अन्य ससुराल वालों के खिलाफ भी संज्ञान लेने की मांग की थी। न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और व्यापक प्रकृति के हैं। ऐसे आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ प्रथमदृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनता।
पति की जिम्मेदारी पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि पत्नी को गरिमा के साथ रखने की मुख्य जिम्मेदारी पति की होती है। निचली अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए केवल पति के खिलाफ संज्ञान लिया है। अदालत ने इसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पायी। रिवीजन खारिज करते हुए अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को निचली अदालत के समक्ष उचित समय पर उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत अपनी बात रखने की स्वतंत्रता रहेगी।