Ranchi News: बहुचर्चित सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट (स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना) में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में झारखंड राज्य बिजली बोर्ड (JSEB) के तत्कालीन अध्यक्ष एस.एन. वर्मा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। रांची सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को उनके खिलाफ आरोप गठन (चार्ज फ्रेम) पर सुनवाई होनी थी, लेकिन बचाव पक्ष द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने के कारण अदालत ने इसे स्थगित कर दिया। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को मुकर्रर की है। साथ ही सख्त निर्देश दिया है कि उस दिन एस.एन. वर्मा को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि 15 जून को अदालत उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर सकती है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में ट्रायल की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
क्या है पूरा मामला और वित्तीय अनियमितता?
सीबीआई की जांच के मुताबिक, यह घोटाला वर्ष 2011-12 में सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट के मरम्मत कार्य के दौरान हुआ था। आरोप है कि नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर भारी वित्तीय गड़बड़ी को अंजाम दिया गया।
- अनुमानित लागत: मरम्मत कार्य की वास्तविक अनुमानित लागत लगभग 2.5 करोड़ रुपये थी।
- आबंटित राशि: नियमों की अनदेखी करते हुए इस काम को सीधे 20.87 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया।
- नुकसान: जांच एजेंसी का दावा है कि इस मनमाने फैसले और भ्रष्टाचार के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद बढ़ा शिकंजा
राहत हुई खत्म: पूर्व में एस.एन. वर्मा को ऊपरी अदालत से राहत मिली हुई थी, जिसके कारण सुनवाई रुकी थी। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत समाप्त किए जाने के बाद विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामले पर दोबारा संज्ञान लिया। अब सभी की निगाहें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं।