New Delhi/Ranchi News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की प्रधान पीठ ने देशभर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) और प्रदूषण नियंत्रण समितियों में भारी संख्या में खाली पड़े पदों पर गहरी चिंता जताई है। NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई करते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) और राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
झारखंड का गठन हुए 26 साल बीते, पर भर्ती नियम अब भी लंबित
मामले में पूर्व आदेश के अनुपालन के तहत JSPCB के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि:
- मात्र 52% कार्यबल: झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वीकृत पदों के मुकाबले संविदा (Contractual) कर्मियों को मिलाकर केवल 52 प्रतिशत वर्कफोर्स के भरोसे चल रहा है।
- भर्ती नियम नहीं बने: राज्य गठन के 26 साल बाद भी बोर्ड के लिए स्थाई भर्ती नियम (Recruitment Rules) अधिसूचित नहीं हो सके हैं। वर्ष 2025 में ड्राफ्ट नियम तैयार कर स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजे गए थे, जो अब भी लंबित हैं।
NGT ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और JSPCB ने इस संवेदनशील मुद्दे को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया है। भर्ती नियमों का न बनना और खाली पदों को न भरना बोर्ड की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
अनेक राज्यों ने CPCB को नहीं सौंपी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि बिहार, यूपी, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रदूषण समितियों ने पूर्व आदेशों के बावजूद अपने जवाब की प्रतियां CPCB को उपलब्ध नहीं कराई हैं।
NGT के मुख्य निर्देश
- 4 सप्ताह का अल्टीमेटम: NGT ने सभी संबंधित राज्यों और समितियों को 4 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट और अद्यतन स्थिति रिपोर्ट (Updated Status Report) CPCB के अधिवक्ता को सौंपने का निर्देश दिया।
- अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

