Ranchi News : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में बड़ी राहत देते हुए छापेमारी के दौरान जब्त की गई 9,64,410 रुपये की नगद राशि उसके असली दावेदार प्रमोद कुमार धानुका को वापस करने का आदेश दिया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश देबाशीष मोहापात्रा की अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। यह पूरा मामला आरसी 03(ए)/2017-डी से जुड़ा हुआ है।
क्या था पूरा मामला और दलीलें?
अदालत में दायर याचिका में प्रमोद कुमार धानुका की ओर से पक्ष रखा गया था कि वे इस आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं। 12 जुलाई 2017 को सीबीआई द्वारा उनके परिसर पर की गई छापेमारी के दौरान उनके कार्यालय से यह रकम जब्त की गई थी। याचिकाकर्ता ने सबूत देते हुए अदालत को बताया कि यह राशि पूरी तरह से वैध स्रोतों से अर्जित की गई है, इसलिए इसे उन्हें वापस किया जाए।
दूसरी ओर, सीबीआई के अभियोजन पक्ष ने राशि की वापसी का विरोध करते हुए दलील दी थी कि यह रकम प्रमोद धानुका और उनके भाई सह इस मामले के सह-आरोपी सुबोध धानुका के आवास/परिसर से बरामद की गई थी। जब्ती के बाद इस राशि को 26 जुलाई 2017 को कॉरपोरेशन बैंक (सीजीओ कॉम्प्लेक्स शाखा, नई दिल्ली) में बैंक खाते में जमा करा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर मिला रिलीफ
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले ‘सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य’ मामले में दिए गए विधिक निर्देशों और सिद्धांतों का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि जब्तशुदा राशि को याचिकाकर्ता को रिलीज कर दिया जाए। हालांकि, राशि प्राप्त करने के लिए प्रमोद कुमार धानुका को बैंक में जमा राशि के समतुल्य क्षतिपूर्ति बांड (इंडमिनिटी बॉंड) और दो विश्वसनीय जमानतदारों को अदालत में प्रस्तुत करना होगा।

