सख्ती: कोर्ट ने कहा- सह-आरोपियों को हथियार सप्लाई करने का आरोप बेहद गंभीर, अभी चल रही है सप्लीमेंट्री जांच
बैकग्राउंड: हाई कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी थी अग्रिम जमानत, 26 मई को आरोपी ने किया था सरेंडर
- कांके थाना का है मामला: साल 2024 में दर्ज केस में सह-आरोपी प्रिंस कुमार के इकबालिया बयान के आधार पर सामने आया था नाम।
- हथियार बरामदगी का केस: प्रिंस कुमार को पुलिस ने देसी कट्टा और मैगजीन के साथ रंगे हाथों दबोचा था, जिसके बाद खुलीं कड़ियां।
Ranchi News: कांके थाना क्षेत्र में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री और सप्लाई करने के मामले में जेल में बंद आरोपी राजेश यादव को अदालत से राहत नहीं मिली है। रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त (AJC-XVII) संजीव झा की अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की नियमित जमानत याचिका (Regular Bail Petition) को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ सह-आरोपियों को अवैध हथियार उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप हैं और फिलहाल मामले में सप्लीमेंट्री (पूरक) जांच जारी है।
हाई कोर्ट से भी लग चुका है झटका
अदालती आदेश के अनुसार, आरोपी राजेश यादव (पिता- लुरका महतो) के खिलाफ कांके थाना में साल 2024 में आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने पहले झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने 3 जुलाई 2025 को उसकी अग्रिम जमानत याचिका (ABA No- 1508/2025) खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी राजेश यादव ने 26 मई 2026 को निचली अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया था, तब से वह न्यायिक हिरासत में जेल में है।
इकबालिया बयान में खुली थी पोल: इस मामले में पुलिस ने पहले सह-आरोपी प्रिंस कुमार को एक देसी कट्टा और मैगजीन के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। प्रिंस ने पुलिस के समक्ष दिए अपने कबूलनामे में खुलासा किया था कि राजेश यादव ही उसे और अन्य अपराधियों को नियमित रूप से अवैध हथियारों की सप्लाई करता था। अनुसंधान के दौरान गवाहों ने भी इस बात की पुष्टि की थी।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बसंत कुमार सिन्हा ने दलील दी कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है और उसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है। प्राथमिकी (FIR) में उसका नाम नहीं था और उसके पास से कोई सीधा हथियार बरामद नहीं हुआ है। सह-आरोपी के खिलाफ बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी (सैंक्शन) के ही चार्जशीट दाखिल की गई है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से एपीपी दीपक कुमार सांगा ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राजेश यादव अवैध हथियारों का मुख्य सप्लायर है। गवाहों के बयानों और केस डायरी से उसकी संलिप्तता पूरी तरह स्पष्ट है, इसलिए उसे बेल की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका को खारिज करते हुए निष्पादित कर दिया।

