Ranchi News: सिविल कोर्ट रांची के Additional Judicial Commissioner-XV की अदालत ने लालपुर थाना क्षेत्र के एक सनसनीखेज मामले में आरोपी शादाब आलम (उम्र 26 वर्ष, पिता- मोहम्मद नूरुल होदा) की नियमित जमानत याचिका (Regular Bail Petition) को खारिज कर दी है। आरोपी शादाब आलम पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(i) [सामूहिक दुष्कर्म या गंभीर दुष्कर्म की श्रेणी] और धारा 123 [अपराधिक साजिश/दुष्कर्म में सहयोग] के तहत मामला दर्ज है। वह 18 अप्रैल 2026 से जेल हिरासत में है।
📌 मामले की मुख्य बातें और अभियोजन (Prosecution) की कहानी
पीड़िता/सूचिका द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार घटना इस प्रकार है:
- बर्थडे पार्टी का झांसा: 9 अप्रैल 2026 को पीड़िता की सहेली (ओली विश्वकर्मा) ने उसे लालपुर के ‘गोकुल वाटिका’ अपार्टमेंट में अपने जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था और कहा था कि वहां कई अन्य लड़कियां भी आ रही हैं।
- नशीला पदार्थ: पीड़िता जब शाम 5 बजे वहां पहुंची, तो उसने देखा कि वहां शादाब आलम (याचिकाकर्ता) अपने दोस्तों फवाद और दानिश के साथ मौजूद था। रात में केक काटने और खाने के बाद, दानिश ने पीड़िता को पिज्जा का एक टुकड़ा दिया। पिज्जा खाते ही पीड़िता अर्ध-बेहोशी की हालत में चली गई।
- कमरे में दुष्कर्म: बेहोशी की हालत में वह आराम करने के लिए एक कमरे में गई। इसी दौरान आरोपी दानिश उस कमरे में घुस गया, अंदर से दरवाजा बंद किया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म (Rape) किया।
- अस्पताल में भर्ती: अगली सुबह गंभीर हालत और अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होने के कारण उसे ऑर्किड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
⚖️ कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता (बचाव पक्ष) के वकील की दलील:
शादाब आलम के वकील श्री एल. बनर्जी ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है। उसे उसकी सहेली ने सिर्फ जन्मदिन की पार्टी में आमंत्रित किया था। घटना में उसकी कोई सीधी भूमिका या साजिश नहीं है। यह फ्लैट भी उसका नहीं है, इसलिए उसे जमानत दी जाए।
सरकारी वकील (APP) का विरोध:
अपर लोक अभियोजक (Addl. P.P.) श्री सिद्धार्थ सिंह ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने केस डायरी का हवाला देते हुए बताया कि:
- Airbnb से बुकिंग: आरोपी शादाब आलम ने ही साजिश के तहत उस फ्लैट (फ्लैट नंबर 401, गोकुल वाटिका) को अपने नाम पर Airbnb ऐप के जरिए बुक किया था।
- पीड़िता पर दबाव: घटना से पहले शादाब ने पीड़िता से पूछा था कि क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड है? जब पीड़िता ने मना किया, तो उसने दानिश की गर्लफ्रेंड बनने की सलाह दी थी, जिसे पीड़िता ने ठुकरा दिया था।
- मुस्कुराते हुए देखना: पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि जब वह दुष्कर्म के बाद कमरे से बाहर आई, तो शादाब और अन्य लोग हॉल में बैठकर उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे।
👨⚖️ अदालत का फैसला
माननीय न्यायाधीश श्री अमित शेखर ने केस डायरी, गवाहों के बयान और मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज पीड़िता के धारा 183 BNSS (पुराना 164 CrPC) के बयानों का अध्ययन करने के बाद पाया कि:
“प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता (शादाब) इस पूरी साजिश में शामिल था। पीड़िता का दुष्कर्म कराने के उद्देश्य से ही उसने सोची-समझी साजिश के तहत फ्लैट बुक किया था। मामले की गंभीरता और जारी जांच को देखते हुए आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।”
नतीजतन, अदालत ने शादाब आलम की regular bail याचिका को खारिज कर दिया।

