अदालती कार्रवाई: अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की कोर्ट ने आईओ के अनुरोध पर समय दिया; 30 जून को होगी अगली सुनवाई
नो कोअर्शन जारी: सुनवाई टलने के साथ ही तीनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर लगी रोक अगली तिथि तक बढ़ी
- ड्यूटी में व्यस्त थे आईओ: लॉ एंड ऑर्डर (विधि-व्यवस्था) की ड्यूटी में व्यस्तता के कारण अदालत में पेश नहीं हो सकी अद्यतन केस डायरी।
- बचाव पक्ष की दलील: याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने रखा पक्ष.
Ranchi News: राजधानी रांची के बहुचर्चित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी मोनू कुमार, सोनू शर्मा और गौरव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Petition) पर रांची सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त (Additional Judicial Commissioner) योगेश कुमार की अदालत में हुई इस सुनवाई के दौरान मामले की अद्यतन केस डायरी (Updated Case Diary) पेश नहीं की जा सकी। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को पूर्व में मिली अंतरिम राहत (नो कोअर्शन) को अगली सुनवाई तक के लिए बढ़ा दिया है।
विधि-व्यवस्था की ड्यूटी के कारण आईओ ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) ने अदालत के समक्ष केस डायरी पेश न कर पाने की वजह बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पिछले कुछ दिनों से लॉ एंड ऑर्डर (विधि-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी) में अत्यधिक व्यस्त थे, जिसके कारण समय पर अद्यतन केस डायरी तैयार कर अदालत में प्रस्तुत नहीं की जा सकी। आईओ ने डायरी रिकॉर्ड पर लाने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हें मोहलत दे दी।
30 जून को होगी अगली सुनवाई, डायरी लाना अनिवार्य
याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने अदालत से आरोपियों की अंतरिम सुरक्षा जारी रखने की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि मुकर्रर की है। साथ ही, अदालत ने अनुसंधानकर्ता को बेहद कड़े शब्दों में निर्देश दिया है कि अगली निर्धारित तिथि पर हर हाल में केस की अद्यतन डायरी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
अगली सुनवाई तक पुलिस नहीं कर सकती गिरफ्तार: अदालत ने अपने पिछले आदेश को बरकरार रखते हुए तीनों आरोपियों (मोनू, सोनू और गौरव) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तिथि तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई (गिरफ्तारी या सख्त कदम) नहीं की जाएगी। इस अंतरिम राहत के जारी रहने से आरोपियों को फिलहाल पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा मिल गई है।

