Ranchi News: चाईबासा जिला कोषागार (ट्रेजरी) से फर्जी तरीके से अवैध वेतन निकासी करने के मामले में जेल में बंद आरोपियों को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। सीआईडी (CID) के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने गुरुवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों प्रमुख आरोपियों—सरकार हेम्ब्रम, अरुण कुमार मार्डी और देवनारायण मुर्मू की जमानत याचिकाएं (Bail Pleas) सिरे से खारिज कर दीं।
अदालत की कार्रवाई और फैसला:
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी सरकार हेम्ब्रम और अरुण कुमार मार्डी की जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित (Reserved) रख लिया था। वहीं, तीसरे आरोपी देवनारायण मुर्मू की याचिका पर भी सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा गया था।
गुरुवार को विशेष अदालत ने मामले से जुड़ी केस डायरी (Case Diary) का गहन अवलोकन करने और सीआईडी व बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें सुनने के बाद यह पाया कि आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसके बाद कोर्ट ने तीनों की जमानत याचिकाएं नामंजूर कर दीं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला चाईबासा जिला कोषागार से मिलीभगत कर अवैध रूप से सरकारी धन (वेतन) की निकासी करने से संबद्ध है। इस वित्तीय धोखाधड़ी के सामने आने के बाद सीआईडी ने जांच अपने हाथ में लेते हुए कांड संख्या xx/2026 दर्ज की थी।
- कुल आरोपी: सीआईडी ने इस घोटाले में अब तक कुल चार लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है।
- वर्तमान स्थिति: सीआईडी द्वारा इस मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। इस कांड में शामिल एक अन्य आरोपी गोराचंद मार्डी भी पहले से ही न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल में बंद है। अदालत के इस ताजा फैसले के बाद अब सभी चारों आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

